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Kushinagar News: 12वीं की छात्रा अंशिका सिंह बनीं एक दिन की थानाध्यक्ष, सुनी फरियादियों की शिकायतें

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Kushinagar News: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में महिला सशक्तीकरण और बालिकाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से पुलिस ने एक विशेष पहल की। मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत द क्रिसेन्ट स्कूल की कक्षा 12वीं की छात्रा अंशिका सिंह को एक दिन के लिए कप्तानगंज थाने का थानाध्यक्ष बनाया गया। इस दौरान उन्होंने थाने में आए फरियादियों की शिकायतें सुनीं और पुलिस की कार्यप्रणाली को करीब से समझा।

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मिशन शक्ति के तहत छात्राओं को कराया गया थाने का भ्रमण

कुशीनगर पुलिस की इस पहल के तहत द क्रिसेन्ट स्कूल की छात्राओं को थाना कप्तानगंज बुलाया गया। यहां थानाध्यक्ष और मिशन शक्ति टीम ने उन्हें थाना परिसर तथा विभिन्न कार्यालयों का भ्रमण कराया। छात्राओं को पुलिस के कामकाज और आम लोगों की समस्याओं के निस्तारण में थाने की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।

इस दौरान महिला हेल्प डेस्क, साइबर हेल्प डेस्क, महिला शक्ति केंद्र, आईजीआरएस कार्यालय, कंप्यूटर कक्ष और जनसुनवाई व्यवस्था के बारे में विस्तार से बताया गया। छात्राओं को थाने में मौजूद हवालात की कार्यप्रणाली से भी परिचित कराया गया।

अंशिका सिंह ने सुनी फरियादियों की शिकायतें

इस कार्यक्रम के अंतर्गत कक्षा 12वीं की छात्रा अंशिका सिंह, पुत्री सुनील कुमार सिंह, निवासी बौलिया, थाना कप्तानगंज, जनपद कुशीनगर को एक दिन के लिए थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।

इस दौरान अंशिका सिंह ने थाना कप्तानगंज पहुंचने वाले फरियादियों की शिकायतें सुनीं। इस अनुभव के माध्यम से उन्हें पुलिस की जिम्मेदारियों, थाने के दैनिक कामकाज और आमजन की समस्याओं को सुनने की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला।

बालिकाओं को अधिकारों और सुरक्षा के प्रति किया जागरूक

कार्यक्रम के दौरान थानाध्यक्ष कप्तानगंज और मिशन शक्ति टीम ने छात्राओं को उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली के बारे में जानकारी दी। साथ ही उन्हें अपने अधिकारों, कर्तव्यों और सम्मान के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया गया।

मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत कुशीनगर पुलिस महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान तथा स्वावलंबन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न जागरूकता गतिविधियां संचालित कर रही है। एक दिन की थानाध्यक्ष बनाने जैसी पहल का उद्देश्य बालिकाओं में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करना तथा उन्हें पुलिस व्यवस्था और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना है।

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