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Raebareli News: साइबर अपराध गैंग से जुड़े तीन और आरोपी गिरफ्तार, चेन्नई और सीवान से जुड़े हैं तार

Three more accused related to cyber crime gang arrested
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Raebareli News: रायबरेली पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए तीनों आरोपी फ्रीज़ किए गए खातों को डिफ्रीज़ कराने के प्रयास में साइबर सेल के रडार पर आ गए थे। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार व्यक्तियों में मथाई अजागन और जावेद जलाल चेन्नई के निवासी हैं, जबकि तीसरा आरोपी दिलशाद आलम बिहार के सीवान का रहने वाला है।

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नौ अप्रैल को हुआ था मुख्य गैंग का पर्दाफाश

इस पूरे मामले की शुरुआत बीते 9 अप्रैल को हुई थी जब रायबरेली के डीह थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति ने अपने बैंक खाते में हुई साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद मामला साइबर थाने को सौंपा गया। साइबर थाना प्रभारी अजय सिंह तोमर ने जब जांच की तो कई ऐसे बैंक खाते सामने आए जिनमें दर्ज मोबाइल नंबर किसी और के नाम से संचालित हो रहे थे। गहराई से पूछताछ करने पर चार युवकों को हिरासत में लिया गया और यहीं से इस अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड गैंग की परतें खुलने लगीं।

साइबर ठगी का चौंकाने वाला तरीका

पुलिस अधीक्षक डॉक्टर यशवीर सिंह ने बताया कि इस गैंग का कार्यप्रणाली बेहद शातिराना है। ये आरोपी खुद को दुबई की ‘ज़मज़म इलेक्ट्रॉनिक्स’ के प्रतिनिधि बताकर लोगों को कॉल करते थे। बातचीत के दौरान उन्हें बताया जाता कि उनके नाम पर एक आईफोन निकला है। फिर कस्टम या कूरियर चार्ज के नाम पर पैसे बैंक खातों में जमा कराए जाते थे।

इन खातों में जमा पैसा बाद में CDMA (Cash Deposit Machine ATM) मशीनों के जरिए बिहार, बंगाल, झारखंड और चेन्नई स्थित खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इस तरीके से ब्लैक मनी को व्हाइट में बदला जाता था और असली खाताधारक को भनक तक नहीं लगती थी।

कैसे खुलते थे फर्जी खाते?

पूछताछ में गिरफ्तार अजय पांडेय नाम के युवक ने खुलासा किया कि वह 2018 में दुबई गया था और 2023 में फिर वहीं पहुंचा। वहां उसकी मुलाकात रहीम नामक व्यक्ति से हुई। रहीम ने उसे अपने इलाके में लोगों के बैंक खाते खुलवाने का प्रस्ताव दिया। बदले में हर ₹50,000 के ट्रांजैक्शन पर ₹700 कमीशन देने का वादा किया गया।

अजय ने डीह और नसीराबाद क्षेत्र में लोगों को यह कहकर बैंक खाते खुलवाए कि सऊदी और दुबई में काम करने वाले लोगों को पैसे भेजने में मदद करनी है। खाताधारकों की जानकारी में ही उनके नाम पर खाते खुलते थे, लेकिन सिग्नेचर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर गैंग के सदस्य अपने लगाते थे।

दो दर्जन खातों के जरिए चला ठगी का जाल

अब तक की जांच में सामने आया है कि इस साइबर गैंग ने करीब दो दर्जन से अधिक खातों का इस्तेमाल किया। इन खातों के जरिए लाखों रुपये की ठगी की गई और CDMA मशीनों की मदद से पैसों को एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर किया गया। रहीम नामक व्यक्ति के जरिए बिहार, बंगाल और झारखंड के खातों में पैसा ट्रांसफर कर दिया जाता था। बदले में गैंग को कुल रकम का करीब छह प्रतिशत हिस्सा मिलता था।

इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ तब हुआ जब डीह थाना क्षेत्र के एक सजग नागरिक ने समय पर अपने खाते में हुई गड़बड़ी की शिकायत की। इसके बाद पुलिस की सतर्कता, साइबर थाना प्रभारी की गहराई से की गई जांच और तकनीकी विश्लेषण से यह पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया।

गौरतलब है कि इससे पहले डीह पुलिस ने पांच साइबर अपराधियों को जेल भेजा था और उनके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे पांच बैंक खातों को सीज़ कर दिया गया था।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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