Delhi News: दिल्ली में विभिन्न मंदिरों में सेवा दे रहे पुजारियों को नियमित वेतन, बेहतर सुविधाएँ और ‘धर्म रक्षक’ का दर्जा देने को लेकर महाराणा प्रताप सेना की ओर से दिल्ली सरकार को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा गया है। संगठन के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजवर्धन सिंह परमार द्वारा जारी यह पत्र 27 नवंबर 2025 को दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा को संबोधित किया गया। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि संगठन कई वर्षों से जन-जागरण यात्रा चला रहा है, जिसके दौरान दिल्ली के मंदिरों में कार्यरत पुजारियों से संवाद स्थापित किया गया और उन्हीं सुझावों के आधार पर यह मांगें सरकार के समक्ष रखी गई हैं।
‘धर्म रक्षक’ के रूप में दी जाए पहचान
पत्र में यह टिप्पणी भी शामिल है— “अजमेर दरगाह नहीं, हमारा पवित्र हिंदू मंदिर याचिकाकर्ता” —जिसका उद्देश्य दिल्ली के मंदिरों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत रूप में प्रस्तुत करना है। संगठन का कहना है कि राज्यभर की यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण सुझाव यह प्राप्त हुआ कि अब दिल्ली के पुजारियों को केवल पुजारी नहीं, बल्कि ‘धर्म रक्षक’ के रूप में सम्मानित किया जाना चाहिए, क्योंकि वे न केवल धार्मिक अनुष्ठान निभाते हैं, बल्कि समाज और संस्कृति के संरक्षक भी हैं।
सभी मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया गया
महाराणा प्रताप सेना ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि दिल्ली के कई मंदिरों में पुजारी वर्षों से कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक नियमित और सम्मानजनक वेतन नहीं मिल पा रहा है। संगठन ने मांग की है कि सभी पुजारियों के लिए एक सुचारु वेतन-व्यवस्था लागू की जाए, ताकि उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्राप्त हो सके। साथ ही, मंदिरों की बिजली सुविधा को निःशुल्क या रियायती श्रेणी में रखने की भी मांग की गई है। संगठन का कहना है कि मंदिर धर्म, संस्कृति और समाज के प्रमुख केंद्र होते हैं, इसलिए बिजली जैसी आवश्यक सुविधा पर छूट देना ना केवल आवश्यक है, बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम भी होगा।
व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता
डॉ. परमार ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में भाजपा सरकार है और लगभग 500 पुजारियों की सूची उपलब्ध होने के बावजूद उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई देता। उनकी मांग है कि पुजारियों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा पर ठोस कदम उठाए जाएं। यात्रा के दौरान पुजारियों ने यह भी बताया कि वे वर्षों से धार्मिक सेवाएँ दे रहे हैं, लेकिन उनकी आवश्यकताओं पर सरकारी स्तर पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। इसलिए सरकार से अनुरोध है कि मंदिरों की बिजली व्यवस्था में रियायत के साथ-साथ पुजारियों को नियमित वेतन-लाभ प्रदान किया जाए, जिससे न केवल पुजारियों का सम्मान बढ़ेगा, बल्कि दिल्ली की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।
अंत में, महाराणा प्रताप सेना ने आशा व्यक्त की है कि मंत्री कपिल मिश्रा इस विषय को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई जल्द सुनिश्चित करेंगे, ताकि दिल्ली के पुजारियों को उनका सम्मान और अधिकार प्राप्त हो सके।
Author: Shivam Verma
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