Nitin Nabin News: भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर रविवार, 14 दिसंबर को बड़ा निर्णय लेते हुए बिहार की धरती से आने वाले युवा नेता नितिन नबीन को पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। 45 वर्षीय नितिन नबीन अब तक के सबसे युवा बीजेपी अध्यक्ष बन सकते हैं। इस फैसले के साथ ही बीजेपी ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि पार्टी नेतृत्व में जनरेशन शिफ्ट की दिशा में आगे बढ़ रही है। अब नितिन नबीन का सीधा मुकाबला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से होगा। उम्र के लिहाज से खड़गे 85 वर्ष और राहुल गांधी 55 वर्ष के हैं, जबकि नितिन नबीन उनसे कहीं छोटे हैं, लेकिन अनुभव के मोर्चे पर वे दोनों पर भारी पड़ते दिखते हैं। छत्तीसगढ़ में अपनी संगठनात्मक काबिलियत दिखा चुके नितिन नबीन के सामने अब राष्ट्रीय स्तर की बड़ी जिम्मेदारी है।
बीजेपी में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत
बीजेपी के इस निर्णय को आने वाले वर्षों की रणनीतिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। जो लोग मोदी-शाह के बाद पार्टी के कमजोर पड़ने की बातें कर रहे थे, उनके लिए यह संदेश है कि बीजेपी 2029 ही नहीं, उससे आगे की राजनीति की भी योजना बना रही है। पार्टी की कमान अब एक युवा नेता के हाथों में होगी, जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व से सीधी टक्कर लेगा।
एबीवीपी से कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर
नितिन नबीन के पिता बिहार बीजेपी के दिग्गज नेताओं में गिने जाते थे। पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए नितिन नबीन ने छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से राजनीति की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा ज्वाइन किया और संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए भाजयुमो के महामंत्री बने। एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में बीजेपी में शामिल होकर वे लगातार आगे बढ़ते गए।
पिता के निधन के बाद पटना पश्चिम सीट पर वर्ष 2006 में हुए उपचुनाव में पार्टी ने नितिन नबीन को मैदान में उतारा। उन्होंने पार्टी के भरोसे पर खरा उतरते हुए जीत हासिल की और मात्र 26 वर्ष की उम्र में विधायक बने। कायस्थ समाज में मजबूत पकड़ के चलते वे अब तक पांच बार विधानसभा पहुंच चुके हैं। वर्तमान में वे बिहार सरकार में पथ निर्माण मंत्री हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह के विश्वासपात्र नेताओं में उनकी गिनती होती है।
कांग्रेस नेतृत्व के सामने युवा चेहरा
नितिन नबीन को ऐसे समय में पार्टी की कमान सौंपी गई है, जब राहुल गांधी देशभर में चुनाव आयोग के खिलाफ माहौल बनाने में जुटे हैं और बीजेपी पर ‘वोट चोरी’ जैसे आरोप लगा रहे हैं। राहुल गांधी का फोकस खासतौर पर युवाओं और जेन-जी वर्ग पर है। इसी रणनीति के जवाब में बीजेपी ने तीसरी पीढ़ी के रूप में नितिन नबीन को आगे कर दिया है, ताकि युवा मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित किया जा सके।
संगठन और चुनावी मोर्चे पर बड़ी परीक्षा
नितिन नबीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती जेन-जी को पार्टी से जोड़ने की होगी। उनसे पहले अमित शाह और जेपी नड्डा इस दिशा में प्रभावी काम कर चुके हैं। अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनी। अब इतनी बड़ी पार्टी को संगठित और सक्रिय बनाए रखना नितिन नबीन के लिए आसान काम नहीं होगा।
आने वाले समय में कई राज्यों के चुनाव उनके लिए अग्निपरीक्षा साबित होंगे। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को सत्ता से हटाने का लक्ष्य है, जबकि असम में सत्ता बचाए रखने की चुनौती होगी। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश जैसे हिंदी भाषी राज्यों में पार्टी के जनाधार को बनाए रखने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर होगी। इसके साथ ही दक्षिण भारत के राज्यों में बीजेपी अपने पैर जमाने की कोशिश कर रही है, जहां नितिन नबीन के संगठनात्मक कौशल की असली परीक्षा मानी जा रही है।
Author: Shivam Verma
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