Aligarh News: चिट्ठियों और लंबी प्रतीक्षा के दौर से निकलकर संचार के साधन जब मोबाइल और इंटरनेट तक सिमट गए, तो रिश्तों की रफ्तार भी तेज हो गई। कुछ ही घंटों में बातचीत गहरी दोस्ती में बदल जाती है और कई बार वही दोस्ती इश्क का रूप ले लेती है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में वर्ष 2025 के दौरान इसी तेज रफ्तार डिजिटल जुड़ाव का असर गंभीर रूप में सामने आया, जब सोशल मीडिया पर दोस्ती और प्रेम के चलते 993 लड़कियों ने घर छोड़ दिया।
एक साल में 993 मामले, देहात में अधिक घटनाएं
अलीगढ़ जिले में महिला थाना सहित कुल 31 थाने हैं। पुलिस आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच बहला-फुसलाकर ले जाने और अपहरण के 993 मामले दर्ज किए गए। औसतन हर थाने में प्रतिदिन तीन रिपोर्ट दर्ज हुईं, यानी जिले में रोजाना 80 से अधिक शिकायतें सामने आईं। शहर की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी संख्या लगभग दोगुनी रही, जिससे सामाजिक संरचना और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए।
पुलिस ने दर्ज मामलों में से अधिकांश लड़कियों को बरामद कर लिया। काउंसिलिंग के बाद कई किशोरियों को परिवार की अहमियत समझ आई और वे घर लौट गईं। हालांकि, बालिग युवतियों के मामलों में पुलिस और परिजन अक्सर असहाय नजर आए। कई थानों में ऐसे दृश्य भी देखने को मिले, जहां माता-पिता ने बेटी के सामने हाथ-पैर जोड़े, फिर भी वे युवक के साथ ही जाने पर अड़ी रहीं।
जागरूकता के लिए ‘ऑपरेशन जागृति’
बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस और शिक्षा विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में संयुक्त जागरूकता अभियान की योजना बनाई है। आगरा जोन से संचालित ‘ऑपरेशन जागृति’ के तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्राम विकास तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ मिलकर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें अपराध पीड़िताओं की काउंसिलिंग, झूठे मामलों के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता, साइबर हैरेसमेंट और साइबर हिंसा से सुरक्षा, तथा एलोपमेंट रोकने के लिए अभिभावकों और किशोर-किशोरियों के बीच संवाद पर जोर दिया जा रहा है। ऑपरेशन जागृति फेज-5 के अंतर्गत नुक्कड़ नाटकों और डिजिटल प्रेजेंटेशन के जरिए कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी जा रही है।
जागरूकता अभियानों में भारतीय न्याय संहिता के उन प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है, जो अपहरण और बहला-फुसलाकर ले जाने से जुड़े अपराधों पर सख्त सजा का प्रावधान करते हैं। पुलिस का मानना है कि कानून की स्पष्ट समझ से ऐसे मामलों में कमी लाई जा सकती है।
आंकड़ों में अभियान का असर
ऑपरेशन जागृति फेज-5 के दौरान आगरा जोन में 3112 स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लगभग साढ़े पांच लाख लोगों से संवाद हुआ। ऑपरेशन जागृति के प्रारंभिक चरण में एलोपमेंट के मामलों में 23 प्रतिशत और कुल महिला संबंधी अपराधों में 18 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। फेज-चार में एलोपमेंट मामलों में 15 प्रतिशत तथा कुल महिला अपराधों में 6.4 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके बावजूद, स्कूलों में अनुशासन की कमी और डिजिटल निगरानी के अभाव को मामलों के बढ़ने का एक कारण माना जा रहा है।
कुल 993 मामलों में से 918 लड़कियों को बरामद किया जा चुका है। काउंसिलिंग के दौरान सामने आया कि कुछ ने स्कूल में दोस्ती और प्रेम के चलते घर छोड़ा, जबकि कुछ को फोन पर नौकरी या अन्य लालच का झांसा दिया गया। शेष 75 लड़कियों की बरामदगी के लिए पुलिस प्रयासरत है।
मनोचिकित्सक डॉ. अंतरा माथुर के अनुसार किशोरावस्था में बच्चों पर ध्यान न दिया जाए तो वे आसानी से भटक सकते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियों की जानकारी माता-पिता को होनी चाहिए और भावनात्मक संवाद बनाए रखना जरूरी है। सुरक्षित, भरोसेमंद और सहायक घरेलू वातावरण बच्चों को घर छोड़ने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एसएसपी नीरज कुमार जादौन ने बताया कि जिले में पिछले एक साल में दर्ज 993 मामलों में से 95 प्रतिशत में बरामदगी हो चुकी है। शेष मामले हालिया हैं, जिनमें प्रयास जारी हैं। अधिकतर प्रकरणों में सोशल मीडिया के जरिए युवक से संपर्क की बात सामने आई है। ऑपरेशन जागृति के तहत मनोवैज्ञानिकों और काउंसलर्स के सहयोग से चल रहा जागरूकता अभियान आगे भी जारी रहेगा, जिसका उद्देश्य काउंसिलिंग के माध्यम से एलोपमेंट के मामलों में कमी लाना है।
Author: Shivam Verma
Description










