Weather Update: देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून का कहर लगातार जारी है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी और मैदानी इलाकों के लिए आगामी कुछ दिनों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण हालात चिंताजनक बने हुए हैं। गांदरबल में बादल फटने की घटना और कई जगहों पर भूस्खलन होने से सड़कों पर आवाजाही ठप हो गई है।
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में भारी बारिश के कारण एक बड़ा वैली ब्रिज टूटकर नदी में बह गया, जिससे चीन सीमा से सटे दारमा, व्यास और चौंदास घाटियों का संपर्क देश के अन्य हिस्सों से कट गया है। इस आपदा के कारण 12 से अधिक गांव पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए हैं, वहीं मानसरोवर यात्रा के यात्रियों की वापसी भी अब एक बड़ी चुनौती बन गई है। स्थानीय प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज करने में जुटा है ताकि जल्द से जल्द संपर्क बहाल किया जा सके।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, 20 से 25 अगस्त के बीच देश के ज्यादातर राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में 21 अगस्त को भारी बारिश की संभावना जताई गई है, जिसके चलते प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी रुक-रुक कर हो रही बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन निचले इलाकों में जलभराव की समस्या बढ़ रही है।
मध्य और पूर्वी भारत पर भी मानसून मेहरबान है। मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में 20 से 25 अगस्त के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। वहीं, पहले से ही बाढ़ की मार झेल रहे ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में भी आगामी दिनों में बारिश की तीव्रता बढ़ने की आशंका है। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी मौसम का मिजाज खराब रहेगा, जहां असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में बारिश का सिलसिला जारी रहने की चेतावनी दी गई है।
मौसम विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान पहाड़ी रास्तों पर अनावश्यक यात्रा से बचें। नदियों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी की संभावना को देखते हुए तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। अगले तीन से चार दिन उत्तर-पश्चिम भारत के लिए काफी अहम हैं, क्योंकि लगातार हो रही बारिश से भूस्खलन और सड़कों के धंसने का खतरा और अधिक बढ़ सकता है।











