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Barabanki News: विकास खण्ड निन्दूरा में आरती व्यास की मंत्रमुग्ध करने वाली आवाज़ में गूंज रही मिथिला धनुष स्वयंवर की दिव्य गाथा

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Barabanki News: विकासखंड निंदूरा के ग्राम बैना में आयोजित सप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिवस श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण देखने को मिला। कृष्णप्रिया कथा वाचिका पूज्य आरती व्यास ने श्रोताओं को मिथिला धनुष स्वयंवर की मार्मिक और भावपूर्ण कथा सुनाई। कथा के दौरान उन्होंने भगवान राम और गुरु विश्वामित्र के वन प्रवेश की ऐतिहासिक घटना का विस्तार से वर्णन किया।

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कथा में बताया गया कि भगवान राम का गुरु विश्वामित्र के साथ वन में प्रवेश केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि धर्म, पराक्रम और मर्यादा का प्रतीक था। इसी यात्रा के दौरान राम और लक्ष्मण ने ताड़का, मारीच और सुबाहु जैसे राक्षसों का संहार कर विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा की। पूज्य आरती व्यास ने कहा कि इसी प्रसंग में राम और लक्ष्मण को दिव्यास्त्रों का ज्ञान प्राप्त हुआ, जिससे श्रीराम का पराक्रम और तेज और अधिक प्रकट हुआ। यह समूचा प्रसंग रामचरितमानस के बालकांड का प्रमुख आधार बना और आगे चलकर जनकपुर में सीता स्वयंवर की नींव रखी।

मिथिला यात्रा और शिव धनुष यज्ञ

राक्षस-संहार के बाद ऋषि विश्वामित्र के आदेश पर राम और लक्ष्मण जनकपुर (मिथिला) की ओर प्रस्थान करते हैं, जहाँ सीता स्वयंवर होने वाला था। कथा में बताया गया कि राजा जनक ने शर्त रखी थी कि जो भी शिव के पिनाक धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा देगा, उसी से सीता का विवाह होगा। इस यज्ञ में अनेक शक्तिशाली राजा और योद्धा सम्मिलित हुए, लेकिन कोई भी धनुष को हिला तक नहीं सका।

राजा जनक ने जब राजाओं की असफलता देखी तो सभा में कठोर शब्द कहे। इस पर सभा में उपस्थित लक्ष्मण खड़े होकर राजा जनक को उत्तर देने लगे, किंतु भगवान राम ने उन्हें शांत कराया। इसके बाद ऋषि विश्वामित्र के आदेश से श्रीराम धनुष की ओर बढ़े।

श्रोताओं को उस ऐतिहासिक क्षण का भावपूर्ण वर्णन सुनाया गया जब श्रीराम ने शिव धनुष को सहजता से उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय प्रचंड ध्वनि के साथ धनुष दो हिस्सों में टूट गया। यह ध्वनि पूरे वातावरण में गूंज उठी। धनुष टूटते ही माता सीता ने श्रीराम को जयमाला पहनाकर उन्हें अपने पति रूप में स्वीकार किया। इस अवसर पर परशुराम-लक्ष्मण संवाद का विस्तृत वर्णन भी किया गया, जिसने श्रोताओं को अत्यंत भावविभोर कर दिया।

कथा वाचिका ने कहा कि यह घटना केवल श्रीराम के पराक्रम का प्रतीक नहीं है, बल्कि सीता और राम के अटूट बंधन और उनके दिव्य विवाह की आध्यात्मिक आधारशिला भी है।

आयोजन, भंडारा और श्रद्धालुओं की सहभागिता

कार्यक्रम के आयोजक रामतेज मौर्या ने बताया कि गांव में स्थित शनिदेव मंदिर, प्राथमिक विद्यालय के पास विगत कई वर्षों से लगातार श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में गांव के भक्तगण निरंतर सहयोग करते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि बृहस्पतिवार को कथा का अंतिम दिवस एवं भंडारे का आयोजन होगा।

इस अवसर पर अरुण रावत, मुकेश सिंह, जय रावत, रामप्रकाश यादव, रामतेज यादव, संजय रावत, सोनू मौर्या, नरेंद्र रावत, रंजीत मौर्या, सुभाष मौर्या सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण किया।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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