लोकशन : जालौन
संवाददाता : लवकुश त्रिपाठी
माँ पीताम्बरा मंदिर शत्रुनाश, राजसत्ता और शत्रुओं पर विजय के लिए जाना जाता है। यह मंदिर बगलामुखी और धूमावती माता को समर्पित है और यहाँ की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। 1935 में सिद्ध संत स्वामीजी महाराज ने इसका स्थापना किया था। तब से यह स्थान आध्यात्मिक और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बन गया है।
स्वामीजी महाराज और उनके चमत्कारी महायज्ञ
स्वामीजी महाराज 1929 में दतिया आए और 1935 में उन्होंने मंदिर की स्थापना की। वे एक रहस्यमयी संत थे और देश व मानवता के कल्याण के लिए कई अनुष्ठान करते थे। 1962 (चीन युद्ध), 1971 (भारत-पाक युद्ध) और 1999 (कारगिल युद्ध) के दौरान यहाँ किए गए महायज्ञों ने देश को विजय और सुरक्षा दिलाई।
वनखंडेश्वर शिव मंदिर
मंदिर परिसर में महाभारत कालीन वनखंडेश्वर शिव मंदिर भी स्थित है, जो धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
श्रद्धालुओं की उपस्थिति और पूजा के समय
शनिवार को दूर-दराज से भारी संख्या में श्रद्धालु यहाँ आते हैं। माँ धूमावती के पट शनिवार को सायं 5 बजे से रात्रि 8 बजे तक खुले रहते हैं, जबकि अन्य दिनों में केवल सुबह-शाम 10 मिनट के लिए आरती पूजन होता है। माँ बगलामुखी के पट रात्रि 10 बजे तक खुले रहते हैं।
राजनीतिक वर्चस्व और स्थानीय आस्था
माँ के दरबार में नेताओं की लंबी कतार उनके राजनीतिक वर्चस्व को बनाए रखने की कोशिशों का प्रतीक भी बन जाती है।











