Lucknow News: लखनऊ के आशियाना इलाके में एक 19 वर्षीय युवक द्वारा अपने पिता की हत्या कर शव के टुकड़े करने की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। घरेलू विवाद से जुड़ा यह मामला अब उत्तर प्रदेश में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
नवाबों के शहर लखनऊ के पॉश क्षेत्र आशियाना में वर्धमान पैथोलॉजी के मालिक मानवेंद्र सिंह की हत्या जिस बर्बरता से की गई, उसने पिता-पुत्र जैसे पवित्र रिश्ते को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। मानवेंद्र सिंह 20 फरवरी से लापता थे। बाद में उनका शव उनके ही घर के एक बंद कमरे में रखे प्लास्टिक ड्रम से बरामद हुआ।
20 फरवरी की सुबह का खूनी घटनाक्रम
घटना की शुरुआत 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे हुई। घर के भीतर मानवेंद्र सिंह और उनके बेटे अक्षत प्रताप सिंह के बीच तीखी बहस चल रही थी। विवाद का कारण पढ़ाई और करियर को लेकर दबाव बताया जा रहा है। मानवेंद्र चाहते थे कि उनका बेटा अक्षत NEET की तैयारी कर डॉक्टर बने, जबकि अक्षत इस दबाव से परेशान था।
जानकारी के अनुसार, विवाद बढ़ने पर मानवेंद्र सिंह ने अपनी लाइसेंसी राइफल उठा ली। परिजनों के अनुसार उन्होंने राइफल केवल डराने के उद्देश्य से उठाई थी। इसी दौरान अक्षत ने राइफल झपट ली और अपने पिता के सीने में गोली चला दी। गोली लगते ही मानवेंद्र सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।
छोटी बहन की दहशत भरी गवाही
गोली की आवाज सुनकर 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली 16 वर्षीय बहन नीचे पहुंची। कमरे का दृश्य देखकर वह घबरा गई। आरोप है कि अक्षत ने उसे धमकी दी कि यदि उसने किसी को कुछ बताया तो वह उसे भी जान से मार देगा।
डरी हुई बहन चार दिनों तक घर में ही रही। इस दौरान अक्षत ने उसे समझाने की कोशिश की कि वह रोज-रोज के झगड़ों से तंग आ चुका था, इसलिए उसने यह कदम उठाया। बहन खौफ के साये में चुप रही, जबकि घर के भीतर शव को छिपाने की तैयारी चलती रही।
सबूत मिटाने के लिए शव के किए टुकड़े
पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या के बाद अक्षत ने शव को तीसरी मंजिल से घसीटकर ग्राउंड फ्लोर के एक खाली कमरे में पहुंचाया। उसने एक आरी खरीदी और शव के टुकड़े किए। गला अलग किया गया और शरीर के कुछ हिस्सों को बाहर ले जाकर सदरौना इलाके के पास फेंक दिया गया। शेष अंगों को एक बड़े प्लास्टिक ड्रम में भरकर घर के भीतर ही छिपा दिया गया, ताकि दुर्गंध बाहर न आए।
चार दिनों तक वह सामान्य व्यवहार करता रहा, जिससे आसपास के लोगों को तत्काल कोई संदेह नहीं हुआ।
शक के बाद खुला मामला
मानवेंद्र सिंह के 20 फरवरी से गायब रहने पर पड़ोसी धर्मेंद्र सिंह सहित अन्य लोगों को संदेह हुआ। चार दिन बीत जाने के बाद भी जब कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली, तो पुलिस को सूचना दी गई।
शुरुआत में अक्षत ने मामले को आत्महत्या दर्शाने की कोशिश की, लेकिन पूछताछ के दौरान उसके बयान विरोधाभासी पाए गए। डीसीपी सेंट्रल विक्रांत वीर और उनकी टीम ने सख्ती से पूछताछ की, जिसके बाद अक्षत ने हत्या की बात स्वीकार कर ली। पुलिस ने घर के बंद कमरे से प्लास्टिक ड्रम में रखा सड़ा-गला शव बरामद किया।
फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से खून के नमूने और आरी समेत अन्य साक्ष्य जुटाए हैं।
जांच के घेरे में हत्या की मंशा
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह वारदात महज आवेश में की गई या फिर पहले से सोची-समझी योजना का हिस्सा थी। करियर का दबाव, पारिवारिक तनाव और संवाद की कमी जैसे पहलुओं को भी जांच में शामिल किया गया है।
आरोपी अक्षत प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस घटना ने लखनऊ के आशियाना क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में पारिवारिक संबंधों और मानसिक दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Author: Shivam Verma
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