Magh Mela 2026: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर की गई टिप्पणी के बाद संत समाज और अखाड़ा परिषद में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस बयान पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने खुलकर आपत्ति जताई है और इसे पूरी तरह अनुचित बताया है।
अखाड़ा परिषद का पलटवार
मीडिया से बातचीत में महंत रविंद्रपुरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर इस तरह की टिप्पणी करना गलत है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह दोष है कि राम मंदिर का निर्माण कराया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री को कटघरे में खड़ा करना तथ्यहीन और अनुचित है।
महंत रविंद्रपुरी ने प्रयागराज में चल रहे आयोजन को लेकर भी भ्रम दूर किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज की धरती पर इस समय माघ मेले का आयोजन हो रहा है, न कि मिनी कुंभ का। यहां शाही स्नान जैसी कोई परंपरा नहीं होती। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए यदि प्रशासन ने किसी समय व्यवस्था बनाए रखने के लिए रोक लगाई, तो इसे स्वीकार किया जाना चाहिए था। प्रशासनिक निर्णयों पर आपत्ति होने की स्थिति में समाधान का रास्ता सरकार से संवाद होना चाहिए, न कि सार्वजनिक विरोध।
बटुकों से मारपीट पर जांच की मांग
शंकराचार्य पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार करते हुए महंत रविंद्रपुरी ने कहा कि उनके भीतर अहंकार की भावना अधिक है। वहीं, बटुकों के साथ कथित मारपीट के मामले पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि यह घटना गलत है, लेकिन इसके लिए मुख्यमंत्री को दोषी ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि उस समय पुलिस व्यवस्था में चार से पांच अधिकारी तैनात थे और पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई के लिए अखाड़ा परिषद मुख्यमंत्री को पत्र लिखेगी।
इस विवाद पर संत समाज की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सतुआ बाबा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शंकराचार्य को संबोधित करते हुए कहा कि वह बचपन से उनके साथ रहे हैं और देश व गंगा से जुड़े मुद्दों पर हमेशा उनके साथ खड़े रहे, लेकिन गोरक्षपीठ के संत के खिलाफ की गई टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि संत समाज माला और भाला दोनों की भाषा जानता है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरिगिरि ने भी इस प्रकरण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से प्रयागराज की मर्यादा धूमिल हो रही है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की, ताकि प्रयागराज की धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा बनी रहे।
Author: Shivam Verma
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