Sant Kabir Nagar: जनपद की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में जिलाधिकारी आलोक कुमार ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने कलेक्ट्रेट के विभिन्न अनुभागों में कार्यरत 38 लिपिकों (बाबुओं) के पटल (सीट) में एक साथ व्यापक फेरबदल किया है। इस अचानक हुए बदलाव से कलेक्ट्रेट परिसर और संबंधित विभागों में हलचल का माहौल बन गया है।
प्रशासनिक सुधार की दिशा में पहल
जिलाधिकारी आलोक कुमार ने इस कार्रवाई को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता लाना है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से एक ही पटल पर कार्य कर रहे कर्मचारियों में कार्य के प्रति शिथिलता आने की संभावना रहती है, जिसे दूर करने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
जानकारी के अनुसार, कलेक्ट्रेट में कई ऐसे कर्मचारी थे जो वर्षों से एक ही पटल पर कार्य कर रहे थे। ऐसे में कार्य प्रणाली में नवीनता लाने और जिम्मेदारियों के बेहतर निर्वहन के उद्देश्य से यह बड़ा फेरबदल किया गया है। जिलाधिकारी का मानना है कि पटल परिवर्तन से कार्यों में गति आएगी और सरकारी प्रक्रियाएं अधिक प्रभावी ढंग से पूरी होंगी।
आदेश के बाद मचा हड़कंप
जैसे ही यह आदेश संबंधित कार्यालयों तक पहुंचा, कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई। इतने बड़े स्तर पर एक साथ हुए बदलाव की किसी को पहले से उम्मीद नहीं थी। आदेश जारी होने के तुरंत बाद संबंधित कर्मचारियों को अपने पुराने पटल का कार्यभार सौंपने और नए पटल की जिम्मेदारी संभालने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासनिक गलियारों में इस कदम को लंबे समय से एक ही सीट पर जमे कर्मचारियों के प्रभाव को कम करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे न केवल कार्यों में पारदर्शिता आएगी, बल्कि आम जनता की शिकायतों के निस्तारण में भी तेजी आएगी और भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर अंकुश लगेगा।
लंबित फाइलों के निस्तारण के निर्देश
जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित कर्मचारी तत्काल प्रभाव से अपने नए पटल पर कार्यभार ग्रहण करें और लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा सुनिश्चित करें। अब इस बड़े प्रशासनिक बदलाव के बाद कलेक्ट्रेट की कार्यप्रणाली में आने वाले समय में कितना सुधार होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
Author: Shivam Verma
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