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Sitapur News: शत्रु संपत्ति की जमीन पर वर्षों से खेती, कार्रवाई से बचता दिख रहा राजस्व विभाग

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Sitapur News: महमूदाबाद क्षेत्र में स्थित शत्रु संपत्ति की जमीन पर लंबे समय से अवैध खेती का मामला सामने आ रहा है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लखपेड़ाबाग क्षेत्र में मौजूद शत्रु संपत्ति की जमीन पर आज भी खस, सरसों, आलू और केला जैसी फसलें लहलहाती नजर आ रही हैं। सवाल यह है कि वर्षों से यह खेती कौन कर रहा है और आखिर कब तक प्रशासन आंख मूंदे रहेगा।

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स्थानीय लोगों के अनुसार, महमूदाबाद की शत्रु संपत्ति लखपेड़ाबाग पर कई बीघा जमीन पर तैयार फसलें खड़ी हैं। यह स्थिति सीधे तौर पर राजस्व नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करती है। इसके बावजूद महमूदाबाद राजस्व विभाग की ओर से केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं और वास्तविक कार्रवाई से बचने की कोशिश की जा रही है। इस लापरवाही के चलते शासन को राजस्व वसूली में करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।

सूत्रों का कहना है कि शत्रु संपत्ति की जमीन पर ‘पर्ची’ के जरिए खेती कराने का खेल लंबे समय से चल रहा है। यह सवाल भी लगातार उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में शत्रु संपत्ति की जमीन पर लोगों को कब्जा दिया जा रहा है और खेती करने की अनुमति कौन दे रहा है। आरोप है कि कुछ लोग अवैध रूप से पर्ची काटकर खेती करवाते हैं और इसके बदले रंगदारी के रूप में वसूली करते हैं।

जानकारी के मुताबिक, जब जिलाधिकारी सीतापुर राजा गणपति आर.के. द्वारा जिले की सभी तहसीलों में लेखपालों से प्रत्येक क्षेत्र की पांच-पांच शत्रु संपत्तियों के नाम और विवरण मांगे गए थे, तब इस शत्रु संपत्ति की जमीन का पूरा ब्यौरा समय से उपलब्ध नहीं कराया गया। यह भी सवालों के घेरे में है कि लेखपालों ने इस जमीन की जानकारी दी या नहीं दी।

सूत्रों के अनुसार, नदीम अहमद राइन पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि राजा किले की ओर से पर्ची काटकर शत्रु संपत्ति की जमीन पर दूसरे लोगों को खेती करने की अनुमति दी जाती है और खेती करने वालों से रुपये वसूले जाते हैं। यदि ये आरोप सही हैं तो यह न केवल कानून का खुला उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

महमूदाबाद की शत्रु संपत्ति लखपेड़ाबाग का यह मामला अब चर्चा का विषय बना हुआ है। आमजन यह जानना चाहता है कि आखिर कब तक शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जा और खेती का खेल चलता रहेगा और कब प्रशासन इस पर सख्त कार्रवाई करेगा।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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