UP News: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर अयोध्या में राम नवमी का पर्व अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। राम नगरी पूरी तरह भक्ति भाव में डूबी नजर आ रही है, जहां हर ओर उत्सव जैसा माहौल है। भगवान राम के जन्मोत्सव के अवसर पर राम मंदिर सहित पूरे शहर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है।
भोर से ही दर्शन के लिए खुले मंदिर के पट
राम जन्मभूमि परिसर में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई थी। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भोर में ही राम मंदिर के पट खोल दिए गए, जिससे बड़ी संख्या में भक्त रामलला के दर्शन कर सके। अयोध्या के प्रमुख धार्मिक स्थलों- राम जन्मभूमि, कनक भवन और हनुमानगढ़ी- में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है।
राम नवमी के अवसर पर दिन की शुरुआत मंगला आरती के साथ हुई। ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के पट खुलने के बाद रामलला का विधिवत अभिषेक किया गया। इस दौरान पंचगव्य, सरयू जल और सुगंधित द्रव्यों से भगवान का स्नान कराया गया। इसके पश्चात उनका भव्य श्रृंगार किया गया और कपूर आरती के साथ पूजा संपन्न हुई।
दोपहर 12 बजे होगा सूर्य तिलक का दिव्य दृश्य
इस पावन अवसर का मुख्य आकर्षण दोपहर 12 बजे होने वाला रामलला का सूर्य तिलक है। निर्धारित समय पर सूर्य की किरणें दर्पण और लेंस की विशेष व्यवस्था के माध्यम से सीधे भगवान राम के मस्तक पर पड़ेंगी। यह अद्भुत दृश्य लगभग 4 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भगवान को 56 प्रकार के भोग अर्पित किए जाएंगे और पंजीरी का प्रसाद भी चढ़ाया जाएगा।
रामलला के जन्मोत्सव पर गूंजेगा बधाई गान
राम नवमी भगवान राम के जन्म का प्रतीक पर्व है। इस अवसर पर रामलला के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में विशेष पूजा के साथ ‘बधाई गान’ का आयोजन भी किया जाएगा। लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह आयोजन भव्य रूप में संपन्न हो रहा है।
मंदिर निर्माण के बाद बढ़ा उत्साह
राम मंदिर निर्माण के बाद इस वर्ष राम नवमी का उत्साह पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन कर रहे हैं और सरयू नदी में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
अयोध्या का यह भव्य राम मंदिर उत्तर भारत की पारंपरिक नागर शैली में निर्मित है। मंदिर परिसर के चारों कोनों पर सूर्य देव, देवी भगवती, भगवान गणेश और भगवान शिव को समर्पित मंदिर स्थापित हैं। इसके अतिरिक्त दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित कुबेर टीला पर जटायु की प्रतिमा भी स्थापित की गई है, जो इस परिसर की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाती है।
Author: Shivam Verma
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