उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से सरगर्मी तेज हो गई है और इसका केंद्र समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का एक नया सोशल मीडिया पोस्ट बना है। राज्य में होने वाले आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है, क्योंकि सपा सुप्रीमो के रुख से संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी इस बार तीसरी सीट के लिए अपना कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारेगी। उनके इस ताजा बयान ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अखिलेश यादव ने अपने एक पोस्ट में साफ शब्दों में लिखा है कि अब उनकी निगाह तीन सीटों पर नहीं बल्कि सीधे चार सौ तीन सीटों पर टिकी हुई है। इस बयान के सियासी मायने बहुत गहरे निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल 403 सीटों पर फोकस करने की बात कहकर अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि उनका असली और मुख्य लक्ष्य साल 2027 का विधानसभा चुनाव है, जिसके लिए पार्टी अभी से अपनी पूरी ताकत झोंक रही है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। किसी भी एक उम्मीदवार को जीत हासिल करने के लिए कम से कम 37 प्रथम वरीयता के वोटों की जरूरत होती है। वर्तमान संख्या बल के हिसाब से समाजवादी पार्टी के पास अपने दम पर दो सीटें जीतने के लिए पर्याप्त विधायक मौजूद हैं। हालांकि, अगर पार्टी को तीसरी सीट पर भी जीत दर्ज करनी होती, तो कुल 111 जादुई आंकड़ों की आवश्यकता पड़ती, जो कि मौजूदा संख्या बल के लिहाज से काफी मुश्किल नजर आ रहा था।
तीसरी सीट को जीतने के लिए सपा को अन्य दलों के विधायकों या फिर कुछ बागी और निर्दलीय विधायकों के समर्थन की दरकार थी। इसके लिए विपक्षी खेमे में जोड़-तोड़ की चर्चाएं भी चल रही थीं, लेकिन पर्याप्त संख्या बल न जुटा पाने की स्थिति में पार्टी किसी भी तरह का जोखिम मोल लेने से बचती दिखाई दे रही है। अखिलेश यादव के इस नए बयान के बाद अब यह लगभग साफ माना जा रहा है कि सपा अपनी रणनीति को दो राज्यसभा सीटों तक ही सीमित रखेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार की रेस से पीछे हटने का फैसला समाजवादी पार्टी की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। पार्टी अपनी ऊर्जा और संसाधनों को बिखरने से बचाने के बजाय सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के लिए जमीनी स्तर पर मजबूत तैयारी करने में लगाना चाहती है। आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति में इस फैसले के क्या दूरगामी परिणाम होंगे, यह तो वक्त ही बताएगा।










