देश के महान उद्योगपति और पद्म विभूषण से सम्मानित रतन टाटा की पुण्यतिथि पर पूरा देश उन्हें नम आंखों से याद कर रहा है। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत तमाम दिग्गज नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। नेताओं ने उनके असाधारण योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन सादगी, परिश्रम, विनम्रता और मानवीय मूल्यों की एक अनूठी मिसाल रहा है.
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में कहा कि उद्योग, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व को हमेशा एक साथ लेकर चलने वाले रतन टाटा का जीवन हर किसी के लिए प्रेरणादायक है। वहीं, दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने उनके दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी दूरदर्शिता और बेहतरीन कार्यशैली से वैश्विक स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया है। इसके अलावा बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी और दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी उनके राष्ट्र निर्माण में दिए गए अमूल्य योगदान को याद किया.
रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को मुंबई में हुआ था और उन्होंने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से आर्किटेक्चर की पढ़ाई पूरी की थी। साल 1991 में जेआरडी टाटा के हाथों से कमान लेने के बाद उन्होंने टाटा समूह को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनके कार्यकाल के दौरान टाटा ग्रुप ने साल 2000 में टेटली और 2007 में कोरस जैसी दिग्गज अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का अधिग्रहण किया। इतना ही नहीं, साल 2008 में जगुआर और लैंड रोवर का अधिग्रहण करके उन्होंने वैश्विक बाजार में भारतीय उद्योग की ताकत का लोहा मनवाया.
जमशेदजी टाटा द्वारा 1868 में स्थापित किए गए इस विशाल व्यापारिक साम्राज्य को रतन टाटा ने नमक और चाय से लेकर स्टील, सॉफ्टवेयर, विमानन और आधुनिक सेमीकंडक्टर निर्माण तक पहुंचा दिया। आज टाटा समूह टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाइटन और एयर इंडिया जैसे बड़े ब्रांड्स के साथ दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित व्यावसायिक घरानों में शुमार है. उनके नेतृत्व में समूह ने व्यापार के नए आयाम गढ़े और देश के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाई.
रतन टाटा की सबसे बड़ी खूबी उनका परोपकारी स्वभाव और समाज के प्रति उनका अगाध प्रेम था। वे सिर्फ एक सफल व्यवसायी नहीं थे, बल्कि संकट के समय हमेशा देशवासियों के साथ खड़े रहने वाले मसीहा थे। कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने पीएम केयर्स फंड में 500 करोड़ रुपये का भारी योगदान देकर अपनी दरियादिली दिखाई थी। शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनके द्वारा शुरू किए गए सामाजिक कल्याण के काम आने वाली अनगिनत पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे.











