बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी के रौद्र रूप ने एक बार फिर भारी तबाही मचाई है. खरीक प्रखंड के अंतर्गत आने वाले राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध के अचानक टूट जाने से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया है. जलस्तर में उतार-चढ़ाव और पानी के भारी दबाव के कारण हुआ यह हादसा स्थानीय लोगों के लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं है, जिससे पूरे क्षेत्र में खौफ का साया मंडरा रहा है.
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ब्रह्म बाबा स्थान से लेकर हनुमान मंदिर तक का लगभग 150 से 300 मीटर लंबा रेलवे टैगिंग बांध पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है. शुक्रवार शाम को शुरू हुए इस खतरनाक कटाव की रफ़्तार इतनी तेज थी कि लोग संभल भी नहीं पाए. देखते ही देखते बाबा बजरंगबली का पवित्र मंदिर और पूर्व जिला पार्षद प्रेमशीला देवी समेत पांच लोगों के पक्के मकान गंगा नदी के तेज बहाव में विलीन हो गए.
इस आपदा के बाद से राघोपुर और उसके आसपास के गांवों में भारी दहशत का माहौल है. पीड़ित परिवारों में प्रेमशीला देवी के अलावा उदय मंडल, पुतुल मंडल, मिथिलेश क्रांति और अनिल मंडल के घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं. अचानक घर और मंदिर को नदी में समाते देख ग्रामीण अपना जरूरी सामान लेकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भागने लगे हैं.
घटना की गंभीरता को देखते हुए नवगछिया के पुलिस अधीक्षक वैभव शर्मा और अनुमंडल पदाधिकारी परीक्षित समेत जिला प्रशासन के तमाम बड़े अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे. प्रशासन की टीम ने हालात का जायजा लेते हुए प्रभावित इलाकों से लोगों को तुरंत बाहर निकाला और माइक के जरिए मुनादी करवाकर ग्रामीणों को नदी के असुरक्षित किनारों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है.
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कटाव स्थल पर नदी की गहराई करीब 40 से 45 फीट तक है, जिसके कारण पानी के अंदर भारी दबाव बन रहा था. स्थिति को काबू करने के लिए नाव के जरिए जियो बैग डालने का प्रयास किया गया, लेकिन कटाव की रफ्तार इतनी भयंकर थी कि सारे प्रयास विफल साबित हुए और बांध भरभराकर ढह गया.











