देश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा की जगह लाई गई नई व्यवस्था ‘वीबी-जी राम जी’ को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर आक्रामक रुख अपनाते हुए बड़ा हमला बोला है और इस नई योजना को ग्रामीण भारत के सामाजिक सुरक्षा कवच पर एक बड़ा प्रहार करार दिया है। पार्टी का कहना है कि यह बदलाव गांवों के गरीबों को मिलने वाले सुरक्षा चक्र को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र के बीड और अन्य जिलों में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। कागजों पर तो हजारों मजदूरों को काम करते हुए दिखाया जा रहा है, लेकिन असलियत में वहां मौके पर कोई भी मजदूर काम करता हुआ नहीं मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की फर्जी व्यवस्था के जरिए गरीबों के हक का पैसा लूटा जा रहा है।
कांग्रेस ने इसे भ्रष्टाचार का नया रूप बताते हुए कहा है कि सत्ताधारी दल से जुड़े स्थानीय लोग मजदूरों की मजदूरी अपनी जेबों में भर रहे हैं। उत्तर प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों से भी फर्जी हाजिरी और क्लोन ऐप घोटालों के सबूत सामने आने का दावा किया गया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार तकनीकी जटिलताओं के जरिए जरूरतमंदों को योजनाओं से बाहर कर रही है और ग्राम पंचायतों के अधिकारों को सीमित कर रही है।
दूसरी ओर, इस राजनीतिक गहमागहमी के बीच तमिलनाडु सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने वीबी-जी राम जी योजना के तहत 125 दिनों का रोजगार पूरा करने वाले ग्रामीण परिवारों को अपने राज्य कोष से 25 दिनों का अतिरिक्त वेतन-रोजगार देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने समीक्षा के बाद अधिकारियों को साल में कुल 150 दिनों तक का काम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
तमिलनाडु सरकार द्वारा दिए जाने वाले इन अतिरिक्त 25 दिनों के रोजगार में कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इस सूची में महिला-प्रधान परिवारों, अकेली महिलाओं, दिव्यांगजनों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और वन अधिकार कानून के दायरे में आने वाले लाभार्थियों को सबसे पहले मौका मिलेगा ताकि समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक इसका लाभ पहुंच सके।










