राजस्थान वन विभाग के सबसे बड़े पद यानी हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स (HoFF) की नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। शासन स्तर पर आयोजित की गई उच्चस्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी की दूसरी बैठक में भी नए मुखिया के नाम पर कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। इस महत्वपूर्ण पद के लिए चल रही अंदरूनी खींचतान और अधिकारियों पर लगे तमाम आरोपों के चलते प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है, जिसके कारण नियुक्ति प्रक्रिया को फिलहाल रोकना पड़ा है।
राजधानी जयपुर स्थित सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में यह अहम बैठक संपन्न हुई। इस उच्चस्तरीय मंथन में एसीएस वन एवं पर्यावरण आनंद कुमार के अलावा मौजूदा हॉफ अरिजित बनर्जी भी बतौर सदस्य शामिल हुए। बैठक के दौरान जब वरिष्ठता और नामों पर विचार शुरू हुआ, तो पीसीसीएफ पवन उपाध्याय के नाम पर चर्चा आते ही मामला उलझ गया और समिति के सदस्यों के बीच असهمति की स्थिति पैदा हो गई।
बैठक में मुख्य रूप से पवन उपाध्याय पर भ्रष्टाचार की जांच को प्रभावित करने से जुड़े गंभीर आरोपों का मुद्दा उठाया गया। कमेटी का स्पष्ट मानना था कि किसी भी अधिकारी के नाम पर मुहर लगाने से पहले तमाम तथ्यों और शिकायतों की गहराई से पड़ताल होना अनिवार्य है। स्थिति को भांपते हुए अब कार्मिक विभाग से संबंधित अधिकारियों के खिलाफ चल रही जांच और शिकायतों के तमाम आधिकारिक दस्तावेज तलब कर लिए गए हैं, जिनकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके शासन को सौंपी जाएगी।
मौजूदा हॉफ अरिजित बनर्जी इसी महीने की 31 तारीख को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं, जिससे प्रशासनिक स्तर पर कोरम और कार्यभार को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए अब स्क्रीनिंग कमेटी की अगली बैठक 31 अक्टूबर के बाद आयोजित किए जाने का निर्णय लिया गया है। जब तक किसी पूर्णकालिक अधिकारी के नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगती, तब तक राज्य सरकार द्वारा किसी वरिष्ठ अधिकारी को इस पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंपे जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है।









