देश में मोबाइल यूजर्स को परेशान करने वाली फर्जी और स्पैम कॉल्स पर लगाम कसने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई ने एक नया और सख्त ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया है. इस नए मसौदे के तहत अब टेलीकॉम कंपनियों को स्पैमर्स के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए किसी ग्राहक की औपचारिक शिकायत का इंतजार नहीं करना पड़ेगा. कंपनियां खुद अपने स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करके तुरंत एक्शन ले सकेंगी.
ट्राई की ओर से जारी किए गए इस नए फ्रेमवर्क का मुख्य उद्देश्य टेलीकॉम नेटवर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के सुरक्षित और जिम्मेदारीपूर्ण इस्तेमाल को बढ़ावा देना है. नियमों के मुताबिक, टेलीकॉम नेटवर्क पर एआई के इस्तेमाल से होने वाले किसी भी परिणाम या खामी की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर संबंधित टेलीकॉम ऑपरेटर की ही होगी. तकनीक चाहे कंपनी ने खुद विकसित की हो या किसी तीसरे पक्ष के वेंडर से ली हो, जवाबदेही कंपनी की ही तय की जाएगी.
नए प्रस्तावों के अनुसार, सभी टेलीकॉम कंपनियों को अपने नेटवर्क के लिए एक आंतरिक एआई नीति तैयार करनी होगी. इस पॉलिसी को कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स या समकक्ष उच्च प्रशासनिक निकाय से मंजूरी दिलाना अनिवार्य होगा. साथ ही, कंपनियों को एआई सिस्टम की निगरानी और सुरक्षा के लिए एक विशेष प्रशासनिक समिति का गठन भी करना होगा, जो हर गतिविधि पर बारीक नजर रखेगी.
ट्राई ने एआई से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ियों और घटनाओं को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया है, जिनमें अत्यंत गंभीर, गंभीर, मध्यम और कम स्तर शामिल हैं. यदि नेटवर्क पर कोई अत्यंत गंभीर या गंभीर स्तर की तकनीकी घटना होती है, तो ऑपरेटरों को एक तय समयसीमा के भीतर नियामक संस्था को इसकी पूरी जानकारी देनी होगी.
आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि जो मोबाइल नंबर या सेंडर आईडी बार-बार स्पैम गतिविधियों के लिए फ्लैग किए जाएंगे, उनकी सेवाएं बिना किसी देरी के तुरंत बंद कर दी जाएंगी. इसके अलावा, ऐसे संदिग्ध नंबरों के खिलाफ री-केवाईसी जैसी कड़ी प्रक्रियाएं भी अनिवार्य की जाएंगी, जिससे साइबर फ्रॉड और फर्जीवाड़े पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी.










