US Iran Attack: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर युद्ध जैसे हालात बनते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिकी हमले के बाद अब ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया है। इस बार तनाव का केंद्र बंदर अब्बास पोर्ट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का इलाका बना हुआ है, जो लंबे समय से दोनों देशों के बीच रणनीतिक टकराव का केंद्र रहा है।
ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित बंदर अब्बास पोर्ट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बेहद करीब है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने पूरे इलाके में तनाव को और गहरा कर दिया है।
IRGC ने अमेरिकी एयरबेस पर हमले की पुष्टि की
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने गुरुवार को दावा किया कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित एक अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइल हमला किया है। हालांकि यह हमला किस अमेरिकी बेस पर किया गया, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सुरक्षा बलों ने यह कार्रवाई गुरुवार तड़के स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 5 बजे की। IRGC द्वारा जारी बयान में कहा गया कि अमेरिकी सेना के एक एक्टिव एयरबेस को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी गईं। ईरान ने इसे अमेरिका की हालिया सैन्य कार्रवाई का जवाब बताया है।
अमेरिकी हमले के बाद भड़का ईरान
इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित ईरानी ठिकानों पर 48 घंटों के भीतर दूसरी बार हमला किया था। बताया गया कि अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास हवाई अड्डे के पास ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया था। इसी कार्रवाई के बाद ईरान ने पलटवार किया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि यह कार्रवाई “रक्षात्मक” थी। अधिकारियों के मुताबिक अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ड्रोन भी तबाह किए, जिन्हें होर्मुज क्षेत्र में संभावित खतरा माना जा रहा था।
पहले भी हो चुकी है भीषण जंग
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को भीषण संघर्ष शुरू हुआ था। बाद में दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ, लेकिन इसके बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके। दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर सीजफायर उल्लंघन के आरोप लगाते रहे हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों और नए हमलों ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच हालात जल्द नियंत्रित नहीं हुए, तो यह टकराव बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है।
Author: Shivam Verma
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