World News: ऑस्ट्रेलिया में एच5एन1 बर्ड फ्लू का प्रकोप तेजी से फैलता जा रहा है, जिसने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में इस घातक वायरस से संक्रमित पक्षियों की संख्या अब 200 के आंकड़े को पार कर गई है। फेडरल डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर, फिशरीज एंड फॉरेस्ट्री द्वारा जारी अपडेट में बताया गया है कि अगस्त महीने में संक्रमण के मामलों में लगभग 290 प्रतिशत की भारी उछाल देखी गई है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
विक्टोरिया और साउथ ऑस्ट्रेलिया इस संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित राज्य बनकर उभरे हैं। विशेष रूप से साउथ ऑस्ट्रेलिया में जंगली समुद्री पक्षियों में इस वायरस के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। इन संक्रमित पक्षियों में ग्रेटर क्रेस्टेड टर्न शामिल हैं, जिनकी बड़ी संख्या में मौत की पुष्टि आधिकारिक तौर पर की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा उपाय करने की आवश्यकता है।
बढ़ते खतरे को देखते हुए विक्टोरियन सरकार ने पोल्ट्री फार्मों के लिए कड़े दिशा-निर्देश लागू कर दिए हैं। मेलबर्न और आसपास के तटीय क्षेत्रों में स्थित उन पोल्ट्री फार्मों को, जहां 50 से अधिक पक्षियों का झुंड मौजूद है, अपने जीवों को कम से कम 14 दिनों तक सुरक्षित तरीके से घर के अंदर रखने का निर्देश दिया गया है। कृषि मंत्री माइकेला सेटल के अनुसार, यह कदम संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए एक एहतियाती सुरक्षा कवच के रूप में उठाया गया है।
हालांकि, ऑस्ट्रेलिया की चीफ वेटरिनरी ऑफिसर बेथ कुकसन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में देश की कृषि प्रणाली में इस वायरस का कोई बड़ा प्रभाव नहीं देखा गया है और इंसानों के लिए फिलहाल कोई सीधा खतरा नहीं है। इसके बावजूद, केंद्र सरकार और वैज्ञानिक संस्था सीएसआईआरओ लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पर्यावरण मंत्री मरे वॉट ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में संक्रमित पक्षियों की तादाद में और भी बढ़ोतरी हो सकती है, जिसे लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
एच5एन1 वायरस का इतिहास काफी डरावना रहा है। इससे पहले साल 2022 में दक्षिण अमेरिका में लगभग 30,000 सी लायन की मौत का कारण यही स्ट्रेन बना था। इसके अलावा, 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत के बीच दक्षिणी महासागर में भी बड़ी संख्या में सील के बच्चों की जान इस वायरस ने ली थी। यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया इस बार किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है और हर संभव सुरक्षात्मक कदम उठा रहा है।
Author: Shivam Verma
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