Rampur News: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में प्रशासन ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए छह सरकारी वकीलों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। राज्य सरकार के न्याय विभाग से प्राप्त निर्देशों के बाद रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले के प्रशासनिक और कानूनी हलकों में हड़कंप मच गया है।
सेवामुक्त किए गए वकीलों में अमित कुमार सक्सेना, संदीप सक्सेना, प्रमोद सागर, ओमप्रकाश लोधी, प्रताप सिंह मौर्य और अमित कुमार के नाम शामिल हैं। इन वकीलों को तत्काल प्रभाव से सरकारी कार्यों से कार्यमुक्त कर दिया गया है। गौरतलब है कि इनमें से कुछ वकील ऐसे भी थे जो समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान और उनके परिवार से जुड़े विभिन्न मुकदमों में सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे थे।
इस बर्खास्तगी के पीछे की ठोस वजहों को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय राज्य सरकार की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, विशेषकर तब जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए सरगर्मियां शुरू हो चुकी हैं। प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि अब्दुल्ला आजम को हाल ही में अदालती मामलों में मिली राहत के बाद शासन ने यह बड़ा कदम उठाया है।
आजम खान और उनके परिवार पर रामपुर में 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें जमीन कब्जाने, हेट स्पीच, फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, डकैती और चोरी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। सरकारी वकीलों को पद से हटाने के इस फैसले को इन मुकदमों को तेजी से निपटाने या कानूनी प्रक्रिया में बदलाव की दिशा में देखा जा रहा है।
स्थानीय जानकारों के मुताबिक, संदीप सक्सेना का भाजपा विधायक आकाश सक्सेना के करीबी होना और वकीलों की अचानक हुई यह छुट्टी कई बड़े सवालों को जन्म देती है। फिलहाल, रामपुर जिला प्रशासन ने इस मामले पर अधिक जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन यह स्पष्ट है कि सरकारी वकील पैनल में बड़े बदलाव से कानूनी लड़ाई का स्वरूप आने वाले दिनों में बदल सकता है।










