West Bengal: बांग्लादेश की मशहूर लेखिका तसलीमा नसरीन दो दशक के लंबे निर्वासन के बाद एक बार फिर कोलकाता लौटने की तैयारी कर रही हैं। अपनी बेबाक लेखनी और क्रांतिकारी विचारों के लिए पहचानी जाने वाली नसरीन आगामी 1 अगस्त को शहर में आयोजित एक विशेष साहित्यिक कार्यक्रम में शामिल होंगी। यह वापसी न केवल उनके प्रशंसकों के लिए एक सुखद खबर है, बल्कि राज्य की बदलती राजनीतिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को भी दर्शाती है।
बता दें कि करीब 20 साल पहले कट्टरपंथी विरोध और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण तसलीमा नसरीन को कोलकाता छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। उस समय वाम मोर्चा की सरकार ने उनकी पुस्तक ‘द्विखंडितो’ के विवाद और बढ़ते सांप्रदायिक तनाव के कारण उन्हें उचित सुरक्षा देने में असमर्थता जताई थी। अब लंबे अंतराल के बाद, राज्य सरकार द्वारा सुरक्षा का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने इस कार्यक्रम में शिरकत करने की सहमति दी है।
रवींद्र सदन में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का जिम्मा ‘सेकुलर मिशन’ और ‘पश्चिमबोंगेर जोन्नो’ जैसे संगठनों ने उठाया है। इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि इसमें मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और प्रसिद्ध लेखक शीर्षेंदु मुखोपाध्याय की मौजूदगी की भी चर्चा है। आयोजकों का मानना है कि यह कार्यक्रम कोलकाता की उस सांस्कृतिक गरिमा को पुनर्जीवित करने का प्रयास है, जिसे वैचारिक मतभेदों के चलते कुछ समय के लिए धक्का लगा था।
तसलीमा नसरीन का जीवन हमेशा से संघर्षों और विवादों के इर्द-गिर्द रहा है। 1993 में प्रकाशित उनके उपन्यास ‘लज्जा’ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें ख्याति दिलाई, लेकिन इसी पुस्तक के बाद उन्हें कट्टरपंथियों की धमकियों का सामना करना पड़ा। बांग्लादेश से निर्वासन के बाद कोलकाता को ही उन्होंने अपना दूसरा घर माना था, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते उन्हें दिल्ली और फिर विदेशों की ओर रुख करना पड़ा।
आगामी 1 अगस्त का कार्यक्रम केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की आजादी के प्रति एक बड़ा संदेश भी है। लेखिका अपने कोलकाता प्रवास के दौरान निर्वासन की उन पीड़ादायक यादों और अपने संघर्षों को अपनी कविताओं के माध्यम से साझा करेंगी। इस वापसी को राज्य में बदलती सियासी हवाओं और प्रशासनिक दृष्टिकोण में आए बदलाव के रूप में भी देखा जा रहा है।
Author: Shivam Verma
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