Barabanki News: बुजुर्गों के सम्मान और उनके अधिकारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बाराबंकी के सफेदाबाद स्थित मातृपित्र सदन में आज एक महत्वपूर्ण विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में उपस्थित वरिष्ठ नागरिकों को भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 के प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर आयोजन
यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर आयोजित किया गया। शिविर का आयोजन माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष DLSA, प्रतिमा श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।
शिविर में अपर जनपद न्यायाधीश/सचिव, DLSA श्रीकृष्ण चन्द्र सिंह मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों को बताया कि आधुनिक जीवनशैली में कई बुजुर्ग उपेक्षा, आर्थिक संकट और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में भरण-पोषण अधिनियम 2007 उन्हें एक मजबूत कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।
भरण-पोषण अधिनियम 2007 : बुजुर्गों के लिए सुरक्षा कवच
श्री सिंह ने स्पष्ट किया कि इस अधिनियम के तहत- माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल की जिम्मेदारी संतान, बहू-दामाद, पोते-पोती या उनकी संपत्ति से लाभ उठाने वाले रिश्तेदारों पर होती है। इसमें भोजन, आवास, इलाज, देखभाल और जीवनयापन की आवश्यक सुविधाएँ भरण-पोषण की श्रेणी में शामिल हैं। तहसील स्तर पर मौजूद भरण-पोषण अधिकरण में सरल और निःशुल्क आवेदन किया जा सकता है। जिसका 90 दिनों के भीतर मामले के निस्तारण की व्यवस्था है। आदेश का उल्लंघन करने पर जुर्माना या सजा का भी प्रावधान है।
बुजुर्गों व कर्मचारियों ने लिया सक्रिय रूप से हिस्सा

शिविर में मातृपित्र सदन के बुजुर्गों, संस्था के कर्मचारियों और DLSA की टीम ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन संस्था के कर्मचारियों द्वारा किया गया। इस जागरूकता शिविर का मुख्य उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक, सुरक्षित और सशक्त बनाना था। जिससे समाज में उपेक्षित बुजुर्ग वर्ग भी अपने अधिकारों को ध्यान में रखकर उनका लाभ उठा सके.
Author: Shivam Verma
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