उत्तर प्रदेश में ‘पंडित’ शब्द को लेकर शुरू हुआ विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस की सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा में पूछे गए सवाल पर उठा बवाल अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब एक नया मामला सामने आ गया है। इस बार विवाद बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित कक्षा 7 की संस्कृत परीक्षा से जुड़ा है, जहां एक पहेली में ‘पंडित’ शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताई जा रही है।
संस्कृत परीक्षा की पहेली बनी विवाद की वजह
हाल ही में आयोजित संस्कृत परीक्षा में छात्रों से एक पहेली पूछी गई- “बिना पैर के दूर तक जाता है और साक्षर है परंतु पण्डित नहीं है।”
इस प्रश्न में ‘पंडित’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर कुछ लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि यह सवाल जातिसूचक है और इससे एक विशेष वर्ग की भावनाएं आहत हो सकती हैं। इसी वजह से इस पहेली को लेकर प्रदेश में नया विवाद खड़ा हो गया है।
प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना है कि इस तरह की पहेलियां संस्कृत की निर्धारित पाठ्यपुस्तकों का हिस्सा नहीं हैं, ऐसे में परीक्षा में इस प्रकार का प्रश्न शामिल किया जाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और प्रश्नपत्र तैयार करने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
पहले भी उठ चुका है ‘पंडित’ शब्द पर विवाद
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब हाल ही में यूपी पुलिस SI भर्ती परीक्षा को लेकर भी बड़ा विवाद हुआ था। 14 और 15 मार्च को आयोजित इस परीक्षा में एक सवाल पूछा गया था – “अवसरवादी कौन?”
इसके उत्तर विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द शामिल होने पर व्यापक विरोध देखने को मिला था। इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप भी ले लिया था और कई नेताओं ने इस पर नाराजगी जताई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त निर्देश जारी करते हुए जांच के आदेश दिए थे। माना जा रहा था कि इस कार्रवाई के बाद ऐसे विवादों पर विराम लगेगा, लेकिन संस्कृत परीक्षा से जुड़ा नया मामला सामने आने के बाद बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
प्रश्नपत्र निर्माण पर उठे सवाल
लगातार सामने आ रहे ऐसे विवादों ने राज्य की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय अधिक संवेदनशीलता और सावधानी बरतने की जरूरत है, ताकि किसी भी समुदाय या वर्ग की भावनाएं आहत न हों।
यह घटनाक्रम इस ओर संकेत करता है कि परीक्षा प्रणाली में सामग्री चयन और भाषा के उपयोग को लेकर गंभीर समीक्षा की आवश्यकता है, जिससे भविष्य में इस तरह के विवादों से बचा जा सके।
Author: Shivam Verma
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