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घुसपैठियों के मुद्दे पर कांग्रेस का अमित शाह पर हमला, पूछे तीन तीखे सवाल और दी नसीहत

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देश की राजनीति में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को आड़े हाथों लिया है और उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि सरकार असल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की रणनीति के तहत घुसपैठियों के मुद्दे को हवा दे रही है ताकि वोटिंग अधिकार छीनने की बात छिप सके।

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए गृह मंत्री अमित शाह से सीधे तौर पर तीन बड़े सवाल पूछे हैं। उन्होंने सरकार के सामने यह स्पष्ट करने की मांग की है कि आखिर देश भर में कितने घुसपैठियों की पहचान की गई है, कितनों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं और कितनों को उनके देश वापस भेजा गया है। रमेश ने कहा कि जब करोड़ों नागरिकों को इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ा है, तो सरकार को इसके स्पष्ट आंकड़े देश के सामने रखने चाहिए।

अपने बयानों में जयराम रमेश ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि घुसपैठियों का बार-बार जिक्र केवल एक राजनीतिक दांव है। उनका मुख्य मकसद लगभग चौदह करोड़ भारतीयों से उनका संवैधानिक वोट देने का अधिकार छीनने जैसी बड़ी कार्रवाई से जनता का ध्यान हटाना है। उन्होंने तंज कसते हुए सवाल किया कि क्या सरकार इन करोड़ों मतदाताओं को विदेशी नागरिक मानती है या फिर गृह मंत्री के कार्यकाल में यह संख्या अचानक इतनी बढ़ गई है।

इस बीच, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी केंद्रीय गृह मंत्री के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्षी दलों के विरोध को घुसपैठियों को बचाने की कोशिश बताना पूरी तरह गलत है। उन्होंने दावा किया कि देश के कई राज्यों में कांग्रेस पार्टी मजबूत वापसी की राह पर है। तिवारी के अनुसार, सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए इस प्रकार के संवेदनशील विषयों का सहारा ले रही है, जिसका जनता करारा जवाब देगी।

दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी चुनावी धोखाधड़ी और लोकतांत्रिक संस्थाओं के कमजोर होने पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से देशवासियों से अपील की है कि वे संविधान, आरक्षण और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए एकजुट होकर आगे आएं। विपक्ष के इन तेवरों से साफ है कि आने वाले दिनों में एसआईआर और मतदाता सूची संशोधन का यह मामला संसद से लेकर सड़क तक बड़ा राजनीतिक तूल पकड़ने वाला है।

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