Hapur News: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हापुड़ में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बेहद गंभीर और खतरनाक साजिश का खुलासा किया है। पुलिस, एटीएस मेरठ और आईबी दिल्ली की संयुक्त कार्रवाई में पाकिस्तान से जुड़े जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि ये आरोपी पाकिस्तान के कुख्यात गैंगस्टर शहजाद भट्टी के इशारों पर भारत में संवेदनशील धार्मिक स्थलों की रेकी कर रहे थे। यह मामला साधारण जासूसी से कहीं आगे बढ़कर एक सुनियोजित आतंकी साजिश का हिस्सा माना जा रहा है, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया।
मुगल गार्डन कॉलोनी से गिरफ्तारी
दोनों आरोपितों को मुगल गार्डन कॉलोनी स्थित एक गैस एजेंसी के पास से गिरफ्तार किया गया। सुरक्षा एजेंसियां कई दिनों से उनकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थीं। जैसे ही पर्याप्त सबूत मिले, टीम ने घेराबंदी कर दोनों को दबोच लिया। गिरफ्तारी के दौरान उनके पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी जांच में राष्ट्र-विरोधी चैट, संदिग्ध फोटो-वीडियो और कई संवेदनशील लोकेशन से जुड़ा डेटा सामने आया है।
एसपी ज्ञानंजय सिंह के अनुसार, दोनों आरोपी दिसंबर 2025 से पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर शहजाद भट्टी के संपर्क में थे। वे इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगातार संवाद कर रहे थे। आरोपी लाइव वीडियो कॉल के जरिए निर्देश लेते थे और रेकी के बाद संबंधित स्थानों की तस्वीरें, वीडियो और सटीक लोकेशन पाकिस्तान भेजते थे।
दिल्ली और नोएडा के धार्मिक स्थल निशाने पर
पूछताछ में खुलासा हुआ कि 19 फरवरी 2026 को आरोपितों ने दिल्ली के रमेश नगर मेट्रो स्टेशन के पास स्थित एक सनातन धर्म मंदिर और आसपास के क्षेत्रों की विस्तृत रेकी की थी। उन्होंने मंदिर परिसर, प्रवेश और निकास मार्ग, आसपास की गलियों और भीड़भाड़ वाले स्थानों का बारीकी से निरीक्षण कर फोटो और वीडियो तैयार किए।
इसके अलावा ग्रेटर नोएडा के बिसरख स्थित प्रसिद्ध रावण मंदिर की भी लोकेशन और वीडियो साझा किए गए थे। एजेंसियों का मानना है कि ये सभी स्थान संभावित टारगेट के रूप में चिन्हित किए गए थे।
आतंकी हमले की साजिश का खुलासा
गिरफ्तार आरोपितों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वे धार्मिक स्थलों की रेकी भविष्य में किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने के उद्देश्य से कर रहे थे। इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। एटीएस और आईबी अब इस साजिश से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने में जुटी हैं।
शहजाद भट्टी को भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़ा हैंडलर मानती हैं। ऐसे में इस पूरे मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है। एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि यह नेटवर्क पहले भी किसी घटना में शामिल रहा है या भविष्य में और बड़े हमलों की योजना बना रहा था।
विदेशी फंडिंग और संदिग्ध लेन-देन का खुलासा
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी अजीम राणा को विदेश से आर्थिक सहायता मिल रही थी। बताया गया कि हैदराबाद में मौजूद शहजाद भट्टी के एक रिश्तेदार के माध्यम से उसे धनराशि भेजी जाती थी। संदिग्ध लेन-देन और विदेशी संपर्कों के चलते अजीम पहले से ही आईबी और एटीएस की निगरानी में था, जिसके बाद उसकी गतिविधियों को ट्रैक किया जाने लगा।
अजीम राणा का परिवार मूल रूप से गांव लालपुर का निवासी है। उसके पिता सलीम राणा करीब आठ वर्ष पहले पिपलैहड़ा स्थित मुगल गार्डन कॉलोनी में आकर बस गए थे। स्थानीय स्तर पर सामान्य जीवन जीने वाले इस परिवार के बेटे की संदिग्ध गतिविधियां सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।
पूछताछ के दौरान आरोपितों ने अपने कुछ अन्य साथियों के बारे में भी जानकारी दी है। इसके बाद एटीएस और आईबी ने इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अभियान तेज कर दिया है। डिजिटल डिवाइस, कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और सोशल मीडिया कनेक्शन की गहन जांच की जा रही है। एजेंसियों को आशंका है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
Author: Shivam Verma
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