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Jharkhand News: झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने की अनोखी पहल, साउथ इंडिया से आएंगे 1000 डॉक्टर और खुद तय करेंगे अपनी सैलरी

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Jharkhand News: झारखंड राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और मजबूत बनाने के लिए हेमंत सरकार ने एक बेहद अनूठी और आधुनिक योजना तैयार की है। राज्य के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी को दूर करने के लिए दक्षिण भारत से लगभग एक हजार पीजी (पोस्ट ग्रेजुएट) डॉक्टरों को आमंत्रित करने की तैयारी चल रही है। इन सभी चिकित्सकों की नियुक्ति संविदा यानी कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर की जाएगी, ताकि राज्य के आम नागरिकों को उनके घर के नजदीक ही उच्च कोटि की चिकित्सीय सुविधाएं आसानी से मिल सकें।

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इस पूरी भर्ती प्रक्रिया की सबसे खास बात इसमें अपनाया जाने वाला नया ‘बिडिंग मॉडल’ है। इस व्यवस्था के तहत डॉक्टरों को पूरी छूट होगी कि वे अपनी पसंद का जिला या अस्पताल खुद चुन सकें। इसके साथ ही वे यह भी तय कर सकेंगे कि चुनी गई जगह पर अपनी सेवाएं देने के एवज में उन्हें कितना मासिक मानदेय यानी सैलरी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से फाइनेंशियल बिड के आधार पर इन अनुभवी चिकित्सकों के पैकेजेज को अंतिम रूप दिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन विशेषज्ञ डॉक्टरों का अधिकतम मासिक मानदेय करीब तीन लाख रुपये तक होने की संभावना जताई जा रही है। इस नई पहल से पहले की उस समस्या का समाधान निकल आएगा, जिसमें कम सैलरी या दूरदराज के जिलों में पोस्टिंग मिलने के कारण डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने से कतराते थे। अब डॉक्टर अपनी इच्छा और वित्तीय संतुष्टि के हिसाब से गांवों और कस्बों के अस्पतालों में अपनी सेवाएं देने के लिए आगे आ सकेंगे।

स्वास्थ्य विभाग इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए दक्षिण भारत के कई प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। विभाग के अधिकारियों का एक दल जल्द ही दक्षिणी राज्यों का दौरा करके चयन प्रक्रिया को पूरा करेगा। इन डॉक्टरों की तैनाती मुख्य रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों यानी सीएचसी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों यानी पीएचसी में की जाएगी, जिससे ग्रामीण जनता को जिला मुख्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।

इस योजना के धरातल पर उतरने से झारखंड के स्वास्थ्य ढांचे में एक बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। खासकर स्त्री रोग, शिशु रोग और सर्जरी जैसे बेहद अहम मेडिकल विभागों में विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ने से गंभीर मामलों में मरीजों को रांची या अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर करने का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। कुल मिलाकर यह कदम राज्य के चिकित्सा क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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