Maharashtra News: महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण परिवर्तन दर्ज किया गया। राज्य के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित पवार के असामयिक निधन के बाद सत्ता और संगठन—दोनों स्तरों पर बड़ा खालीपन उत्पन्न हो गया था। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में पार्टी और सरकार ने उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी। इसके साथ ही सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बन गई हैं, जिसे राजनीतिक दृष्टि से एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
अजित पवार के निधन से उत्पन्न राजनीतिक शून्य
अजित पवार का अचानक निधन एनसीपी और महाराष्ट्र सरकार के लिए गहरा झटका साबित हुआ। वे उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ वित्त जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल रहे थे और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की रीढ़ माने जाते थे। पिछले साढ़े तीन दशकों में उन्होंने जिस तरह पार्टी की नींव और कार्यप्रणाली को आकार दिया था, उनके जाने से नेतृत्व और प्रशासन—दोनों में शून्य पैदा हो गया। ऐसे में पार्टी के भीतर यह सहमति बनी कि इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सुनेत्रा पवार को आगे आना चाहिए।
मिली जानकारी के अनुसार, शुरुआती दौर में सुनेत्रा पवार इस जिम्मेदारी को लेने के लिए तैयार नहीं थीं। उन्होंने अपने सीमित राजनीतिक अनुभव और पार्टी में मौजूद गुटबाजी जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया। हालांकि बारामती में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में उनके बेटे जय पवार और पार्थ पवार के साथ-साथ रणनीतिकार नरेश अरोरा ने परिस्थितियों और पार्टी हितों को विस्तार से रखा। विधायकों की भावनाओं और संगठन की आवश्यकता को देखते हुए सुनेत्रा पवार ने अंततः उपमुख्यमंत्री पद स्वीकार करने का निर्णय लिया।
शपथ ग्रहण और संगठनात्मक संकेत
शनिवार को दोपहर 2 बजे एनसीपी विधायक दल की बैठक हुई, जिसके बाद शाम 5 बजे सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह कदम केवल औपचारिक नहीं माना जा रहा, बल्कि इससे पार्टी की एकजुटता को मजबूत करने का स्पष्ट संदेश गया है। वरिष्ठ नेताओं और विधायकों के लिए यह संकेत भी है कि अजित पवार की राजनीतिक विरासत को अब उनकी पत्नी आगे बढ़ा रही हैं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, सुनेत्रा पवार के सामने कई चुनौतियाँ होंगी। एनसीपी में लंबे समय से अलग-अलग गुट सक्रिय हैं और कई वरिष्ठ नेता अपने व्यक्तिगत व राजनीतिक हितों के अनुसार रुख अपनाते रहे हैं। ऐसे में पार्टी को एकजुट रखना और विरोधियों का सामना करना उनकी प्राथमिक परीक्षा होगी। इस दौर में शरद पवार की भूमिका भी निर्णायक मानी जा रही है। यदि अजित पवार गुट और शरद पवार गुट एकजुट रहते हैं और मार्गदर्शन मिलता है, तो पार्टी को नई मजबूती मिल सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुनेत्रा पवार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितनी तेजी से राजनीतिक अनुभव अर्जित करती हैं, सहयोगियों का चयन संतुलित ढंग से करती हैं और संगठन के भीतर सामंजस्य बनाए रखती हैं। शनिवार का दिन महाराष्ट्र की राजनीति में इसलिए भी ऐतिहासिक बन गया है क्योंकि यह परिवर्तन न केवल महिला नेतृत्व को नया आयाम देता है, बल्कि राज्य की राजनीतिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अजित पवार की विरासत को आगे बढ़ाते हुए सुनेत्रा पवार अब राज्य की राजनीति में एक नए नेतृत्व के रूप में उभर चुकी हैं।
Author: Shivam Verma
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