Manipur Violence: मणिपुर में पिछले काफी समय से जारी हिंसा के पीछे केवल जातिगत और राजनीतिक कारण ही नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे एक गहरी आर्थिक साजिश भी काम कर रही है। राज्य के आम लोग एक ऐसे अदृश्य टैक्स और जबरन वसूली के जाल में फंसे हैं, जिसने उनका जीना मुहाल कर दिया है। इंफाल से लेकर कांगपोकपी तक, हर जरूरी चीज जैसे पेट्रोल, एलपीजी सिलेंडर और यहां तक कि रोजमर्रा की कमाई का एक बड़ा हिस्सा आपराधिक गिरोहों और बागी गुटों की जेब में जा रहा है, जिसे स्थानीय स्तर पर अवैध टैक्स का नाम दिया गया है।
ड्रग्स का कारोबार इस अशांति को और हवा दे रहा है। म्यांमार की सीमा से सटा होने के कारण मणिपुर अब अफीम की खेती का एक बड़ा केंद्र बन चुका है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में हजारों एकड़ में फैली अफीम की फसल को नष्ट किया गया है, लेकिन इसके बावजूद संगठित अपराध का यह नेटवर्क बार-बार सक्रिय हो जाता है। नशीले पदार्थों से होने वाली मोटी कमाई का उपयोग हथियारों की खरीद और युवाओं को गलत राह पर धकेलने के लिए किया जा रहा है, जिससे राज्य की आंतरिक सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
जबरन वसूली का नेटवर्क इतना संगठित हो चुका है कि इसने राज्य की अर्थव्यवस्था पर कब्जा कर लिया है। हाईवे पर अवैध चेकपॉइंट बनाकर ट्रकों से मनमानी वसूली की जा रही है, जिसका सीधा असर आम नागरिक की जेब पर पड़ता है। कई मामलों में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और विकास कार्यों के लिए आवंटित बजट तक में से हिस्सा काटा जा रहा है। नतीजा यह है कि मणिपुर में पेट्रोल और गैस जैसी बुनियादी जरूरतें सामान्य कीमतों से कई गुना अधिक महंगी मिल रही हैं, जिससे महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है।
पड़ोसी राज्य मिजोरम की तुलना में मणिपुर की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। जहां मिजोरम ने शांति और विकास का रास्ता चुनकर अपनी प्रति व्यक्ति आय और जीवन स्तर में सुधार किया है, वहीं मणिपुर का एक बड़ा हिस्सा अभी भी जबरन वसूली और संघर्ष के चक्रव्यूह में उलझा हुआ है। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और दक्षिण-पूर्व एशिया के द्वार (मोरेह) के रूप में अपनी क्षमता के बावजूद, मणिपुर की अर्थव्यवस्था केवल सरकारी अनुदानों पर निर्भर होकर रह गई है।
इस संकट से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता इस अवैध सिंडिकेट को जड़ से खत्म करना है। केवल गोलीबारी बंद करना काफी नहीं होगा, जब तक कि नशीले पदार्थों की तस्करी और जबरन वसूली पर लगाम नहीं लगाई जाती, तब तक शांति संभव नहीं है। यदि सरकार अफीम माफिया, वसूली गैंग्स और धन मुहैया कराने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करती है, तभी मणिपुर का आम नागरिक डर और शोषण के इस माहौल से मुक्त होकर एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ पाएगा।
Author: Shivam Verma
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