World News: मध्य पूर्व एशिया में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर से चरम पर पहुंच चुका है, जहां सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है। ये दोनों पक्ष एक-दूसरे के तेल ठिकानों को अपने हमलों का मुख्य निशाना बना रहे हैं। इस ताजा संघर्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। वाशिंगटन में इस बात को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है कि कच्चे तेल के बुनियादी ढांचे पर हो रहे इन हमलों से अंततः अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम आसमान छू सकते हैं, जिसका सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका साफ तौर पर मानना है कि यमन के हूती विद्रोही गुट द्वारा सऊदी अरब के ऑयल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ये हमले सोची-समझी रणनीति के तहत किए जा रहे हैं। ट्रंप का आरोप है कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य अमेरिका में होने वाले आगामी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा करना और तेल की कीमतों में भारी उछाल लाना है ताकि इसका राजनीतिक नुकसान मौजूदा प्रशासन को उठाना पड़े।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दिए बयानों के मुताबिक, ट्रंप ने ईरान की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हूती विद्रोही काफी समय तक शांत थे, लेकिन अब वे तेहरान के इशारे पर फिर से सक्रिय हो गए हैं। अमेरिका का मानना है कि ईरान अपनी आंतरिक आर्थिक बदहाली और महंगाई से ध्यान भटकाने के लिए इन प्रॉक्सी समूहों का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे वैश्विक शांति और ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।
इस बीच, अमेरिका के भीतर महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत आम जनता के लिए बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुकी है। फरवरी के महीने में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और संघर्ष में कूदने के ट्रंप के फैसले के बाद से फ्यूल और एनर्जी के दाम तेजी से बढ़े हैं। आगामी चुनावों में मतदाता यह तय करने वाले हैं कि क्या संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रपति की पार्टी अपना बहुमत बरकरार रख पाएगी या नहीं, और डेमोक्रेटिक पार्टी इस स्थिति का पूरा फायदा उठाने की फिराक में है।
दूसरी ओर, हाल ही में सामने आए चुनावी सर्वेक्षणों से यह स्पष्ट हो गया है कि ईरान के साथ इस नए सैन्य संघर्ष को अमेरिकी नागरिकों का खास समर्थन नहीं मिल रहा है। अधिकांश मतदाताओं का मानना है कि इस तरह की जंग में उलझना देश के हित में नहीं था। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इन तमाम ओपिनियन पोल्स को खारिज करते हुए अपनी रैलियों में उमड़ने वाली भारी भीड़ को अपनी लोकप्रियता का असली प्रमाण बताया है, लेकिन आने वाले चुनाव नतीजों पर इस तेल संकट का असर पड़ना तय माना जा रहा है।











