Delhi News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्यों द्वारा किए गए प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय राजधानी की राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सीजेपी के प्रमुख नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया है, जबकि तीसरे सदस्य अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया है। इस पूरी कार्रवाई के बाद से विपक्षी दलों और प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी कड़ा रुख अपनाया है और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना और अपने हक की आवाज उठाना कोई गुनाह नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जंतर-मंतर देश की आम जनता का है और लोग इसे वापस हासिल करेंगे। उनके इस बयान के बाद सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने उनका आभार व्यक्त किया है।
कॉकरोच जनता पार्टी की लीगल टीम ने दिल्ली पुलिस पर अदालत में गलत तथ्य पेश करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि पुलिस जानबूझकर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की कोशिश कर रही है। सीजेपी नेताओं का यह भी सवाल है कि क्या देश की राजधानी में तिरंगा फहराना अब अपराध की श्रेणी में आ गया है। इस बीच तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने भी इस गिरफ्तारी की कड़ी आलोचना की है।
दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस का अपना पक्ष है जिसके तहत अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने निषेधाज्ञा और कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया था। पुलिस का आरोप है कि सीजेपी कार्यकर्ताओं ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को रोकने का प्रयास किया और बार-बार नियमों को तोड़ा। इसी सिलसिले में एसईएम कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ यह सख्त कदम उठाया है, जिसके बाद से लगातार राजनीतिक बयानबाजी का दौर जारी है।
फिलहाल सीजेपी ने साफ कर दिया है कि वे संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी इस लड़ाई को आगे भी जारी रखेंगे। पार्टी का तर्क है कि सरकार चाहे जितने भी प्रयास कर ले, वे जनता के अधिकारों के लिए आवाज उठाना बंद नहीं करेंगे। इस पूरे मामले ने एक बार फिर दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों के नियमों और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर बहस छेड़ दी है।











