राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विजन को आगे बढ़ाते हुए राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने नई दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में देश के कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन से एक अहम मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान राज्य में चल रहे प्रमुख विकास कार्यों और प्रशासनिक सुधारों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने केंद्र सरकार के शीर्ष अधिकारी को प्रदेश में उठाए जा रहे कदमों की पूरी जानकारी दी।
बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु ‘डिरेगुलेशन एंड कम्प्लायंस रिडक्शन’ यानी नियमों के सरलीकरण की दिशा में राज्य की प्रगति रहा। मुख्य सचिव ने बताया कि राजस्थान ने इसके पहले चरण में निर्धारित सभी 23 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अपने लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। वहीं, दूसरे चरण के तहत चुने गए 28 क्षेत्रों में से 24 पर केंद्र सरकार की तरफ से भी मंजूरी मिल चुकी है। राज्य स्तर पर बाकी बचे कार्यों को भी तेजी से पूरा किया जा रहा है।
प्रशासनिक सुधारों के इस सफर में आम जनता और व्यापारियों को बड़ी राहत देने का प्रयास किया गया है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि भवन निर्माण की अनुमति, नई फैक्टरियों की स्थापना और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े लाइसेंस प्राप्त करने की जटिल प्रक्रियाओं को काफी आसान बना दिया गया है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में अनावश्यक नियमों की बाधाओं को खत्म करके व्यापार और निवेश के लिए एक बेहतर व अनुकूल माहौल तैयार करना है।
इसके अलावा, बैठक में ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ की उपलब्धियों को भी प्रमुखता से रखा गया। इस अनूठी पहल के जरिए राज्यभर में प्राचीन पांडुलिपियों के सर्वेक्षण और उनके डिजिटलीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। अब तक लगभग 24 लाख 63 हजार से अधिक पांडुलिपियों का सत्यापित सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है, जबकि लगभग 1.61 लाख पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित भी किया जा चुका है।
सरकार की इस योजना के तहत विश्वविद्यालयों, धार्मिक मठों, मंदिरों, पुस्तकालयों और निजी संरक्षकों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। संस्कृत, प्राकृत, पाली, फारसी और अरबी जैसी प्राचीन भाषाओं के ऐतिहासिक ग्रंथों को संजोया जा रहा है ताकि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से आज की युवा पीढ़ी तक आसानी से पहुंचाया जा सके।










