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Justice Swarna Kanta: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा अवमानना मामला, राजदीपा बेहुरा होंगी न्याय मित्र, 4 अगस्त को अगली सुनवाई

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Justice Swarna Kanta: दिल्ली हाईकोर्ट ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ कथित टिप्पणियों और सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े आपराधिक अवमानना मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता राजदीपा बेहुरा को एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह मामले में अरविंद केजरीवाल की ओर से दलील पेश करेंगी, ताकि सुनवाई निष्पक्ष और प्रभावित हुए बिना आगे बढ़ सके।

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शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंद्र दुग्गल की डिवीजन बेंच ने यह नियुक्ति की। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त तय की है।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर टिप्पणियों से जुड़ा है मामला

यह मामला आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक अवमानना कार्यवाही से संबंधित है। आरोप है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को लेकर की गई कथित टिप्पणियों और सोशल मीडिया सामग्री के जरिए अदालत की गरिमा तथा न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजदीपा बेहुरा को न्याय मित्र नियुक्त किया है। एमिकस क्यूरी के रूप में उनकी भूमिका अदालत को कानूनी पहलुओं पर निष्पक्ष सहायता और सुझाव उपलब्ध कराना होगी।

अदालत ने पहले ही लिया था अवमानना का संज्ञान

बार एंड बेंच में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वह पहले ही इस प्रकरण में अवमानना का संज्ञान ले चुकी है। कोर्ट ने बताया कि इसी तरह के आरोपों से जुड़ा एक स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) आपराधिक अवमानना मामला पहले से लंबित है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अशोक चैतन्य ने अदालत को बताया कि मामले में अन्य प्रतिवादी भी शामिल हैं। इस पर पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, “हम मामलों को लगातार बढ़ाते नहीं रह सकते, वरना यह संभालना मुश्किल हो जाएगा।”

अदालत ने निर्देश दिया कि नई याचिका को पहले से लंबित सुओ मोटू अवमानना मामले के साथ जोड़ा जाएगा।

दोनों मामलों की एक साथ होगी सुनवाई

कोर्ट ने कहा कि लगभग समान आरोपों के आधार पर अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज के खिलाफ पहले ही अवमानना कार्यवाही शुरू की जा चुकी है और उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं।

हालांकि, गोपाल राय और सौरव दास स्वत: संज्ञान वाले मामले में पक्षकार नहीं हैं। ऐसे में अदालत ने उन्हें बिना प्रोसेस फीस के नोटिस जारी करने का आदेश दिया। दोनों को 4 अगस्त तक अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि वर्तमान याचिका में जिन दस्तावेजों और सामग्री का हवाला दिया गया है, उनकी प्रतियां अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज को भी उपलब्ध कराई जाएं।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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