Bankipur By-Election 2026: बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस हाई-प्रोफाइल सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। यह सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। पिछले लगभग तीन दशकों से बांकीपुर विधानसभा सीट बीजेपी का मजबूत गढ़ रही है, लेकिन यहां मतदान का प्रतिशत लगातार करीब 40 फीसदी के आसपास ही रहा है। ऐसे में अब राजनीतिक चर्चा इस बात को लेकर तेज हो गई है कि क्या प्रशांत किशोर की एंट्री उन 60 फीसदी मतदाताओं को मतदान केंद्र तक ला पाएगी, जो अब तक मतदान से दूर रहे हैं। वहीं, राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) के चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी से बढ़ा चुनावी मुकाबला
जन सुराज पार्टी की कोर कमेटी की बैठक के बाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी की आधिकारिक घोषणा की। इसके साथ ही बांकीपुर उपचुनाव ने पूरे बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 6 जुलाई को उपचुनाव का गजट नोटिफिकेशन जारी किया जा रहा है। 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से यह चुनाव केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे बिहार की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर प्रशांत किशोर का हमला
उम्मीदवारी की घोषणा के बाद प्रशांत किशोर ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर सीधा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने मुख्यमंत्री को “बैकडोर” से आया हुआ नेता बताते हुए कहा कि बिहार की जनता को उनके चाल, चरित्र और चेहरे पर भरोसा नहीं है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर के प्रबुद्ध मतदाताओं के सामने बेहतर विकल्प चुनने का अवसर है और यह उपचुनाव मौजूदा सरकार को स्पष्ट संदेश देने का माध्यम बन सकता है।
तीन दशक से बीजेपी का अभेद्य गढ़ रही है बांकीपुर सीट
बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से बीजेपी की सबसे सुरक्षित सीटों में गिनी जाती रही है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों—2015, 2020 और 2025—में नितिन नबीन को लगातार 59 से 62 प्रतिशत के बीच वोट मिले। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने 51 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी।
हालांकि, इस सीट की एक महत्वपूर्ण विशेषता लगातार कम मतदान प्रतिशत भी रहा है। पिछले तीनों चुनावों में यहां औसतन केवल करीब 40 प्रतिशत मतदान हुआ। इसका अर्थ है कि लगभग 60 प्रतिशत मतदाता मतदान प्रक्रिया में शामिल ही नहीं हुए।
इसी वर्ग को ध्यान में रखकर जन सुराज पार्टी अपनी रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी का दावा है कि बीजेपी और आरजेडी दोनों से निराश मतदाता अब एक नए राजनीतिक विकल्प की तलाश में हैं और जन सुराज उस विकल्प के रूप में सामने आना चाहती है।
जन सुराज के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव
नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव जन सुराज पार्टी के लिए निराशाजनक साबित हुए थे। पार्टी ने 243 में से 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी थी। उस चुनाव में प्रशांत किशोर स्वयं उम्मीदवार नहीं बने थे, जिसे राजनीतिक विश्लेषकों ने पार्टी के कमजोर प्रदर्शन का एक प्रमुख कारण माना।
अब बांकीपुर उपचुनाव में खुद मैदान में उतरकर प्रशांत किशोर ने अपनी राजनीतिक साख को दांव पर लगाया है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा है कि अगले 10 वर्षों तक बिहार में बदलाव लाना ही उनका प्रमुख लक्ष्य रहेगा और बांकीपुर की जीत इस अभियान को नई दिशा देने का काम करेगी।
RLJP की एंट्री से मुकाबला हुआ और रोचक
बांकीपुर उपचुनाव में अब मुकाबला केवल जन सुराज और एनडीए के बीच सीमित नहीं रहेगा। पशुपति पारस के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) ने भी इस सीट से अपना उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है।
पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रिंस पासवान ने इसकी जानकारी देते हुए राज्य सरकार को दलितों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घेरा। वर्ष 2021 में लोक जनशक्ति पार्टी में हुई टूट के बाद से पशुपति पारस अपनी राजनीतिक जमीन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव उनकी पार्टी के लिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
Author: Shivam Verma
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