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India News: सुप्रीम कोर्ट ने CRPF को लगाई फटकार, घायल जवान को नौकरी से निकालने पर सुनाया बड़ा फैसला

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India News: देश की सर्वोच्च अदालत ने हाल ही में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के खिलाफ एक कड़ा रुख अपनाते हुए सख्त टिप्पणी की है। मामला ड्यूटी के दौरान दृष्टिहीन हुए एक पूर्व कांस्टेबल को नौकरी से बर्खास्त करने का है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि एक जिम्मेदार संस्था होने के नाते सीआरपीएफ को घायल जवान को बाहर का रास्ता दिखाने के बजाय उसे किसी वैकल्पिक पद पर समायोजित करना चाहिए था, जो उन्होंने नहीं किया।

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न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम की धारा 47 का पालन करना हर सरकारी प्रतिष्ठान के लिए अनिवार्य है। यदि कोई जवान सेवा के दौरान दिव्यांग होता है, तो बल का यह नैतिक और कानूनी कर्तव्य है कि वह उसे समान वेतन और लाभों के साथ किसी अन्य पद पर नियुक्त करे।

अदालत ने पूर्व कांस्टेबल को राहत देते हुए 1.25 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। यह राशि उनके बकाया वेतन, ब्याज और मुकदमे के दौरान हुए खर्चों की भरपाई के लिए दी गई है। हालांकि कांस्टेबल सेवानिवृत्ति की आयु सीमा पूरी कर चुके हैं, इसलिए उन्हें फिर से बहाल करने के बजाय यह वित्तीय मुआवजा दिया गया है, जो उन्हें समय से पहले सेवा से निकाले जाने की सजा का एक हिस्सा है।

पूरा मामला वर्ष 1996 का है, जब सीआरपीएफ में ड्राइवर के पद पर तैनात जवान को नेत्र रोग हो गया था। मेडिकल जांच में उनकी दृष्टि प्रभावित होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद बल के चिकित्सा बोर्ड ने उन्हें सेवा के लिए अयोग्य मानकर 1998 में बर्खास्त कर दिया था। उस समय जवान ने मदद की गुहार लगाई थी, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सीआरपीएफ की 2002 की अधिसूचना इस मामले पर लागू नहीं होती, क्योंकि जवान को 1998 में ही अयोग्य घोषित कर दिया गया था। कानून को पिछली तारीख से लागू करके किसी को अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। यह फैसला उन सभी अर्धसैनिक बलों के लिए एक नजीर है जो अपने बहादुर जवानों के साथ ड्यूटी के दौरान हुई दुर्घटनाओं के बाद मानवीय दृष्टिकोण अपनाने के बजाय उन्हें सेवा से हटाने का आसान रास्ता चुन लेते हैं।

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