Ashadh Amavasya 2026: आषाढ़ मास की अमावस्या के पावन अवसर पर मंगलवार को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम पर आस्था का महाकुंभ सा नजारा देखने को मिला। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी थी। दूर-दराज से आए भक्तों ने पवित्र संगम में डुबकी लगाकर अपने दिन की शुरुआत की और ईश्वर के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या का दिन पितृ कार्य और तर्पण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। संगम तट पर श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की शांति और मोक्ष की कामना करते हुए विधि-विधान के साथ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म किए। बड़ी संख्या में लोगों ने जरूरतमंदों को दान देकर पुण्य कमाया और अपने परिवार के सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
इस अवसर पर स्थानीय तीर्थ पुरोहितों ने संगम स्नान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आषाढ़ अमावस्या, विशेषकर मंगलवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या का फल कई गुना अधिक होता है। संगम की पावन धारा में स्नान करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि पितृ दोष से मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि पितरों के प्रसन्न होने से घर में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
संगम में स्नान के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह देखा गया। कमलेश पांडेय जैसे भक्तों ने बताया कि इस पवित्र दिन का इंतजार वे पूरे साल करते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि गंगा मैया की कृपा से देश में सुख-शांति बनी रहती है और सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। हर तरफ ‘हर-हर गंगे’ के उद्घोष से पूरा संगम तट गुंजायमान रहा।
सुरक्षा और प्रबंधन के लिहाज से भी प्रशासन की ओर से विशेष तैयारियां की गई थीं। घाटों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात रहा, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित रूप से स्नान कर सकें। आषाढ़ अमावस्या का यह धार्मिक पर्व प्रयागराज में एक बार फिर आस्था और परंपरा के मिलन का साक्षी बना, जहां हजारों की संख्या में लोगों ने पूरी निष्ठा के साथ अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन किया।
Author: Shivam Verma
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