TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। राज्य में पार्टी के भीतर जारी आंतरिक कलह और नेताओं के पलायन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा घटनाक्रम में पार्टी की राज्यसभा सांसद रुक्मिणी, जिन्हें कोयल मलिक के नाम से भी जाना जाता है, ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने ममता बनर्जी की पार्टी की नींव को और कमजोर कर दिया है।
टीएमसी के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया है। इससे पहले राज्यसभा के तीन प्रमुख सांसद सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक भी अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं। इन लगातार हो रहे इस्तीफों ने पार्टी आलाकमान की चिंताएं बढ़ा दी हैं और संगठन के भविष्य पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, केवल राज्यसभा तक ही बगावत सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के लोकसभा सांसदों में भी भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। खबरों की मानें तो टीएमसी के 20 से अधिक लोकसभा सांसदों ने पार्टी से किनारा करते हुए ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी’ का हाथ थाम लिया है। यह एक बड़ा राजनीतिक बदलाव माना जा रहा है, जो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पकड़ ढीली होने के संकेत दे रहा है।
विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस के विधायक और सांसद लगातार पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मुखर रहे हैं। असंतुष्ट नेताओं का एक गुट पहले ही अलग राह चुन चुका है, जिससे विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आगामी समय में पार्टी के लिए अपनी साख बचाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
रुक्मिणी ‘कोयल’ मलिक का इस्तीफा एक ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही कई मोर्चों पर संकट का सामना कर रही है। हालांकि, कोयल मलिक की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर इस्तीफे के स्पष्ट कारणों का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन उनके इस कदम को पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी का परिणाम माना जा रहा है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
Author: Shivam Verma
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