Hamirpur News: गांव-गांव विकास और स्वच्छता का दावा करने वाला सरकारी तंत्र आखिर खुद कितना व्यवस्थित है? इसकी तस्वीर हमीरपुर जनपद के राठ विकास खंड कार्यालय में देखने को मिलती है। यहां सरकारी भवन जर्जर हो चुके हैं, दीवारों में दीमक लग चुकी है, नालियां गंदगी से बजबजा रही हैं और करीब एक लाख रुपये की लागत से खरीदा गया वाटर कूलर पिछले एक साल से धूल फांक रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब विकास की कमान संभालने वाला कार्यालय ही बदहाल हो, तो गांवों में विकास और स्वच्छता की स्थिति कैसी होगी।
विकास योजनाओं की निगरानी करने वाला कार्यालय खुद बदहाल
राठ विकास खंड कार्यालय से क्षेत्र के गांवों में संचालित विकास योजनाओं की निगरानी की जाती है, लेकिन कार्यालय परिसर की स्थिति सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही है। कार्यालय भवन और सरकारी आवास वर्षों से रंगाई-पुताई का इंतजार कर रहे हैं। कई स्थानों पर दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है, जबकि दीमक भवन की दीवारों को खोखला कर रही है। लगातार उपेक्षा के चलते भवन की स्थिति दिन-ब-दिन जर्जर होती जा रही है।

गंदगी से बजबजा रही नालियां, टूटी बाउंड्री से सुरक्षा पर सवाल
ब्लॉक परिसर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। नालियां गंदगी से भरी हैं और नियमित सफाई नहीं होने के कारण परिसर में दुर्गंध फैली रहती है। विडंबना यह है कि यही कार्यालय गांवों में स्वच्छता अभियान की निगरानी की जिम्मेदारी निभाता है। कार्यालय परिसर की बाउंड्री वॉल भी कई स्थानों से क्षतिग्रस्त और टूटी हुई है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं सरकारी अभिलेखों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से बनाया गया अभिलेखागार भवन भी उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।
एक साल से बंद पड़ा है एक लाख रुपये का वाटर कूलर
कार्यालय परिसर में कर्मचारियों और आम लोगों की सुविधा के लिए करीब एक लाख रुपये की लागत से खरीदा गया वाटर कूलर पिछले एक साल से चालू नहीं हो सका है। वह धूल फांक रहा है। वहीं सार्वजनिक शौचालय में पानी की टंकी तक नहीं है और अधिकांश समय शौचालय बंद रहता है।
ग्रामीणों और कर्मचारियों का आरोप है कि ब्लॉक परिसर में वर्षों से पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। प्यास लगने पर उन्हें बाहर से पानी खरीदकर पीना पड़ता है। उनका कहना है कि जब विकास योजनाओं का संचालन करने वाला ब्लॉक कार्यालय ही इस स्थिति में है, तो गांवों में विकास और स्वच्छता की वास्तविक स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
बजट के अभाव का हवाला
खंड विकास अधिकारी मनोज कुमार गुप्ता ने बताया कि भवन की मरम्मत और रंगाई-पुताई के लिए शासन स्तर पर लगातार पत्राचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बजट के अभाव में आवश्यक कार्य नहीं हो पा रहे हैं। बजट उपलब्ध होते ही भवन की मरम्मत, रंगाई-पुताई तथा अन्य जरूरी कार्य कराए जाएंगे।
राठ विकास खंड कार्यालय की मौजूदा स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस कार्यालय से विकास योजनाओं और स्वच्छता अभियान की निगरानी की जाती है, वही यदि बदहाली का शिकार हो, तो विकास कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
Author: Shivam Verma
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