Supreme Court: देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले में संज्ञान लेते हुए दो निजी अस्पतालों पर भारी जुर्माना लगाया है। मामला चार साल की एक मासूम बच्ची से जुड़ा है, जो दुष्कर्म जैसी वीभत्स घटना की शिकार हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अस्पताल द्वारा समय पर इलाज देने से इनकार करना मानवीयता के खिलाफ है और इसके लिए उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना आवश्यक है।
अदालत की इस कार्रवाई के तहत गाजियाबाद के दो निजी अस्पतालों को पीड़िता के परिवार को कुल 12 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है। इनमें से सेंट जोसेफ अस्पताल को 10 लाख रुपये और खजान सिंह मानवी हेल्थ केयर को 2 लाख रुपये का हर्जाना भरना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इन अस्पतालों को यह राशि चार सप्ताह के भीतर पीड़ित पिता को सौंपने का सख्त आदेश जारी किया है।
सुनवाई के दौरान विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट ने पूरी घटना की भयावहता को उजागर किया। रिपोर्ट में बताया गया कि बच्ची हमले के बाद करीब पांच घंटे तक जीवित थी। यदि उसे समय पर उचित उपचार और चिकित्सा सहायता मिल जाती, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। इलाज देने में बरती गई यह घोर लापरवाही अब इन संस्थानों के लिए महंगी साबित हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर नाराजगी जताते हुए संकेत दिए हैं कि वह भविष्य के लिए सख्त दिशानिर्देश तैयार करने की योजना बना रही है। शीर्ष अदालत का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर अपराधों के पीड़ितों को किसी भी अस्पताल में भर्ती करने से इनकार न किया जाए और पुलिस प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारियों का पूरी तरह पालन करे।
याद दिला दें कि यह घटना 16 मार्च की है, जब एक छोटी बच्ची के साथ दरिंदगी की गई थी। उस वक्त इलाज के लिए दर-दर भटकने के बाद सरकारी अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया था। पिता की याचिका पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने न केवल अस्पतालों को फटकार लगाई है, बल्कि पुलिस के शुरुआती रवैये पर भी सवाल उठाए हैं।
Author: Shivam Verma
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