Sonbhadra News: जिले को बाल श्रम मुक्त बनाने की दिशा में प्रशासन ने अपनी कवायद तेज कर दी है। इसी क्रम में कलेक्ट्रेट सभागार में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई। बैठक में बाल एवं किशोर श्रमिकों के चिन्हांकन, रेस्क्यू, पुनर्वासन तथा बाल श्रम उन्मूलन अभियान को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न विभागों की भूमिका की समीक्षा की गई।
वर्ष 2026 तक बाल श्रम मुक्त बनाने का लक्ष्य
बैठक में बताया गया कि प्रदेश के सभी जनपदों को वर्ष 2027 तक बाल श्रम मुक्त घोषित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं आकांक्षी जनपदों समेत 16 जनपदों को वर्ष 2026 तक बाल श्रम मुक्त घोषित किया जाना है। इसी लक्ष्य के तहत सोनभद्र में श्रम विभाग, एएचटी और संबंधित स्वयंसेवी संस्थाओं के समन्वय से जागरूकता एवं रेस्क्यू अभियान संचालित किए जा रहे हैं।
अभियान के दौरान जून और जुलाई माह में जिले में 33 बाल एवं किशोर श्रमिकों का चिन्हांकन किया गया। इसके साथ ही 27 संस्थानों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की गई। बैठक में चिन्हांकित बच्चों के शैक्षणिक एवं आर्थिक पुनर्वासन के साथ उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने को लेकर भी चर्चा की गई।
सोनभद्र के 10 विकासखंडों की 621 ग्राम पंचायतों, 6 नगर पंचायतों और 1 नगर पालिका को दिसंबर 2026 तक बाल श्रम मुक्त घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए ग्राम पंचायत, ब्लॉक और वार्ड स्तर पर गठित बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों के माध्यम से प्रस्ताव पारित कराए जाएंगे। इसके बाद इन प्रस्तावों को जिला स्तरीय समिति से अनुमोदित कराया जाएगा।
बैठक में बंधुआ श्रमिकों, सड़क पर रहने वाले तथा बेघर बच्चों के चिन्हांकन, बचाव और पुनर्वासन के लिए गठित टीमों की भूमिका की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को रेस्क्यू एवं पुनर्वासन अभियान में सक्रिय सहयोग करते हुए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
विभिन्न विभागों के अधिकारी और संस्थाओं के प्रतिनिधि रहे मौजूद
बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक, सीओ, डिप्टी सीएमओ, डीएलएसए प्रतिनिधि, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, पुलिस विभाग, चाइल्ड हेल्पलाइन, जिला कौशल प्रबंधन, बीडीओ, जिला पूर्ति विभाग, एएचटी, श्रम विभाग तथा विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
Author: Shivam Verma
Description










