Parliament Mansoon Session: संसद के मानसून सत्र के दौरान आज लोकसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सदन में भारी शोर-शराबे और विरोध के बावजूद सरकार ने खनिज एवं खनन संशोधन विधेयक 2026 को बिना किसी चर्चा के पारित करवा लिया। पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने विपक्ष के हंगामे के बीच विधायी कार्यों को आगे बढ़ाया और विपक्षी सांसदों के रवैये पर नाराजगी भी जाहिर की।
इसी बीच विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक यानी एफसीआरए बिल को लेकर भी सदन में गहमागहमी रही। सरकार ने इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसे मंजूरी दे दी गई है। यह विधेयक एनजीओ को मिलने वाली विदेशी फंडिंग और उनकी संपत्ति पर सरकार की निगरानी को और अधिक सख्त बनाने का प्रावधान करता है। विपक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी।
विपक्ष के नेता केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि इस कानून का इस्तेमाल अल्पसंख्यक संगठनों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। इन आरोपों का खंडन करते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि एफसीआरए विधेयक किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है। उन्होंने विपक्ष को याद दिलाया कि वे स्वयं इस विधेयक को जेपीसी के पास भेजने की मांग कर रहे थे, इसलिए अब उन्हें इस पर खुशी जतानी चाहिए।
लोकसभा में जारी हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को एक बार फिर दोपहर तीन बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। इससे पहले केरल का नाम बदलने और सहकारी क्षेत्र से जुड़े विधेयकों को भी बिना बहस के पारित कर दिया गया। सदन में विपक्षी सांसद गृह मंत्री अमित शाह से देश के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में हुए छात्र प्रदर्शनों पर बयान देने की मांग पर अड़े हुए हैं, जिससे विधायी कामकाज प्रभावित हो रहा है।
वहीं दूसरी ओर, राज्यसभा में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा जारी है, जिसे बीते दिन ही लोकसभा से मंजूरी मिली थी। ऊपरी सदन में सदस्यों के बीच आपसी टिप्पणियों को लेकर भी माहौल गर्म रहा, जिस पर सदन के नेता जेपी नड्डा ने सदस्यों को आपसी गलतफहमियां दूर करने की सलाह दी। फिलहाल संसद के दोनों सदनों में राजनीतिक घमासान अपने चरम पर है।
Author: Shivam Verma
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