Home » देश-विदेश » World News: नेपाल में बाढ़ का कहर- चितवन में लावारिस शवों को दफनाने पर मचा बवाल, परिवारों ने उठाए सवाल

World News: नेपाल में बाढ़ का कहर- चितवन में लावारिस शवों को दफनाने पर मचा बवाल, परिवारों ने उठाए सवाल

Nepal flood disaster Chitwan dead bodies recovery
Facebook
X
WhatsApp

World News: नेपाल इन दिनों कुदरत के एक भीषण तांडव का सामना कर रहा है। हिमालयी क्षेत्रों में आई बाढ़ और भूस्खलन ने वहां तबाही की ऐसी लकीर खींच दी है जिसे भरना नामुमकिन सा लग रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में अब तक 903 लोगों की जान जा चुकी है। मौत का यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे प्रशासन और बचाव दलों पर भारी दबाव है। स्थिति इतनी गंभीर है कि चितवन जैसे जिलों में बड़ी संख्या में शव बरामद हो रहे हैं, जिनकी पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

चितवन में हालात इतने बदतर हो गए हैं कि जिला प्रशासन को शवों को बिना पहचान किए ही अस्थायी कब्रों में दफनाने का कठिन निर्णय लेना पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भोटेकोशी नदी के जरिए सैकड़ों किलोमीटर दूर से बहकर आए करीब 250 शवों को रिकवर किया गया था। चिलचिलाती गर्मी और अत्यधिक नमी के कारण शव जल्दी सड़ने लगे थे, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने महामारी फैलने की चेतावनी दी थी। मजबूरी में एक एक्सकेवेटर की मदद से विशाल गड्ढे खोदे गए और दर्जनों शवों को दफनाया गया।

इस आनन-फानन में की गई कार्रवाई पर अब विवाद खड़ा हो गया है। लापता लोगों के परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना उनकी सहमति के और हिंदू धार्मिक मान्यताओं को दरकिनार करते हुए शवों को दफनाया है। परिजनों का कहना है कि वे अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार पूरी मर्यादा और परंपरा के साथ करना चाहते थे। रूबी चौधरी जैसे कई लोग, जिनके रिश्तेदार अभी भी लापता हैं, इस प्रक्रिया को मृतकों के प्रति अनादर मान रहे हैं।

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई ने भी इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि खोज और बचाव अभियान अभी जारी है, ऐसे में बिना उचित प्रक्रिया और परिवारों की भागीदारी के अज्ञात शवों का निपटान करना पूरी तरह गलत है। सरकार के इस कदम ने न केवल पीड़ितों के परिवारों की नाराजगी बढ़ाई है, बल्कि आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मौजूदा समय में राहत कार्यों में बाधाएं भी आ रही हैं। रविवार को हुए भूस्खलन के कारण काठमांडू और चितवन को जोड़ने वाला मुख्य राजमार्ग फिर से बंद हो गया है, जिससे राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता का पहुंचना मुश्किल हो गया है। अधिकारियों के लिए अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ शवों को सम्मानजनक तरीके से ठिकाने लगाना और दूसरी तरफ बाढ़ से बचे हुए लोगों तक जल्द से जल्द जरूरी संसाधन पहुंचाना।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

Description

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताजा खबरें