World News: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और दिग्गज नेता डोनाल्ड ट्रंप ने लेबर डे के अवसर पर जारी अपने ताजा घोषणापत्र में एच-1बी वीजा याचिकाओं पर भारी-भरकम नई फीस लागू करने के प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया है। उनका यह बयान अमेरिका की राजनीति और टेक सेक्टर में काफी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि इससे देश के वर्कफोर्स बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
अपने आधिकारिक संदेश में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इस नई फीस का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी कंपनियों को विदेश से सस्ते प्रोफेशनल या टैलेंट को बुलाने के बजाय घरेलू स्तर पर स्थानीय नागरिकों को रोजगार देने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कंपनियां बाहरी लेबर पर निर्भर होने के बजाय योग्य अमेरिकी नागरिकों को नौकरी देने और उन्हें प्रशिक्षित करने में अपना निवेश बढ़ाएं।
गौरतलब है कि अमेरिका का एच-1बी वीजा प्रोग्राम वहां की बड़ी तकनीकी कंपनियों और अन्य नियोक्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय है, जिसके जरिए वे दुनियाभर से कुशल प्रोफेशनल्स को अपनीित करते हैं। चूँकि इस वीजा प्रणाली के सबसे बड़े लाभार्थियों में भारतीय नागरिक शामिल रहे हैं, इसलिए इस प्रकार के किसी भी नीतिगत बदलाव पर भारत और अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय की पैनी नजर बनी हुई है।
डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने एच-1बी याचिकाओं के लिए 1,03,265 डॉलर की भारी फीस का प्रस्ताव रखा है, जिसे आवेदन के वक्त ही चुकाना होगा। हालांकि कानूनी मोर्चे पर इस तरह के शुल्कों को लेकर पहले भी खींचतान देखने को मिली है, क्योंकि पूर्व में संघीय अदालतों ने ट्रंप प्रशासन के इसी तरह के अन्य शुल्कों पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद नए नियमों को विधिवत रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है।
ट्रंप ने अपनी इस नीति को अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और घरेलू श्रमिकों के हितों की रक्षा करने वाली व्यापक रणनीति का अहम हिस्सा बताया है। उनका मानना है कि ऐसे कड़े कदमों और सुरक्षात्मक शुल्कों की बदौलत अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र और घरेलू रोजगार को आने वाले समय में अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।
Author: Shivam Verma
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