Ambala Building Collapse: हरियाणा के अंबाला कैंट स्थित धूलकोट इलाके में हुए दर्दनाक इमारत हादसे के मामले में पुलिस प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। बीते रविवार को हुए इस भीषण हादसे में मलबे के नीचे दबने से छह बेकसूर लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। इस गंभीर घटना को अंजाम देने वाले सुरक्षा मानकों के घोर उल्लंघन और भारी लापरवाही को प्रशासन ने बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया है।
पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस सिलसिले में पुलिस ने त्वरित और कड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य बिल्डर, प्रॉपर्टी के मालिक और मौके पर निर्माण कार्य की देखरेख करने वाले सुपरवाइजर के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। यह सख्त कानूनी कदम मौके पर काम करने वाले मजदूरों और प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा दिए गए बयानों के आधार पर उठाया गया है, जिससे साफ होता है कि निर्माण कार्य में सुरक्षा के बुनियादी नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया था।
हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य पूरा होने के बाद अब प्रशासन ने इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए कमर कस ली है। अंबाला के पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत के निर्देश पर एक उच्चस्तरीय विशेष जांच दल यानी एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया गया है। यह विशेष टीम इस बात की गहराई से पड़ताल करेगी कि क्या इमारत के निर्माण के दौरान तय प्रशासनिक नियमों और नक्शे की अनदेखी की गई थी या नहीं।
जांच के दायरे में यह भी शामिल है कि क्या भवन निर्माण के दौरान घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ था, जिसकी वजह से यह बहुमंजिला इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। एसआईटी की टीम कंक्रीट, सीमेंट और सरिए के नमूनों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज रही है ताकि तकनीकी कमियों और लापरवाही के हर एक सबूत को कानूनी रूप से मजबूत किया जा सके।
प्रशासनिक अधिकारियों ने दो-टूक शब्दों में चेताया है कि इस दर्दनाक हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस का यह सख्त एक्शन इस बात का संकेत है कि भविष्य में कोई भी डेवलपर या ओनर जनसुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न जुटा सके। पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना और दोषियों को कानून के कठघरे में खड़ा करना इस वक्त प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता बना हुआ है।










