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Avimukteshwaranand: अविमुक्तेश्वरानंद की बढ़ीं मुश्किलें, पॉक्सो केस में मेडिकल रिपोर्ट से यौन शोषण की पुष्टि, कोर्ट में कल सुनवाई

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Avimukteshwaranand POCSO Case: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज पॉक्सो (POCSO) मामले में एक महत्वपूर्ण मेडिकल रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में पीड़ित बटुकों के साथ जबरन यौन उत्पीड़न की पुष्टि होने का दावा किया गया है। इस घटनाक्रम के बाद कानूनी प्रक्रिया ने तेजी पकड़ ली है और अब अदालत में कल होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गिरफ्तारी का सामना करना पड़ेगा या उन्हें किसी प्रकार की राहत मिलेगी।

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मेडिकल जांच में गंभीर आरोपों की पुष्टि

ताजा मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, जिन बच्चों ने उत्पीड़न की शिकायत की थी, उनकी जांच में जबरन यौन कृत्य के संकेत पाए गए हैं। यह रिपोर्ट अब केस की फाइल में आधिकारिक दस्तावेज के रूप में शामिल हो चुकी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट ने जांच एजेंसियों को कार्रवाई के लिए ठोस आधार प्रदान किया है।

मामला पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज है, जो नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराधों से जुड़े मामलों में कठोर दंड का प्रावधान करता है। रिपोर्ट के सामने आने के बाद आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी की संभावना और प्रबल मानी जा रही है।

‘गुरु दीक्षा’ के नाम पर शोषण के आरोप

पीड़ित बटुकों ने एक विशेष साक्षात्कार में मठ परिसर के भीतर होने वाली कथित घटनाओं का विवरण दिया है। बच्चों का आरोप है कि उन्हें ‘गुरु दीक्षा’ देने के नाम पर अलग कमरे में बुलाया जाता था और वहां उनके साथ आपत्तिजनक हरकतें की जाती थीं।

उनके अनुसार, यह घटनाएं केवल कुछ बच्चों तक सीमित नहीं थीं। राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों से भी बच्चों को मठ में लाए जाने का दावा किया गया है। बटुकों ने कहा है कि लगभग 20 अन्य बच्चे भी इस तरह की घटनाओं का शिकार हो चुके हैं, लेकिन भय के कारण सामने नहीं आ पा रहे हैं। उनका आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती थी।

मठ परिसर के ‘गुप्त कमरे’ का जिक्र

पीड़ितों ने मठ परिसर में एक विशेष कमरे का भी उल्लेख किया है, जहां कथित रूप से स्वीमिंग पूल बना हुआ है। उनका आरोप है कि वहां कुछ महिलाएं उन्हें नहलाती थीं और बाद में प्रभावशाली व्यक्तियों के सामने पेश किया जाता था।

बटुकों ने दावा किया है कि कई रसूखदार लोग वहां आते-जाते थे, जिन्हें वे पहचानते हैं। बच्चों के अनुसार, भय और दबाव के बीच वे किसी तरह मठ से बाहर निकल पाए और दूसरे धार्मिक गुरु के पास पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है। वाराणसी में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

उनका कहना है कि शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज का पुलिस टीम के साथ मौजूद रहना जांच की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। स्वामी ने आरोप लगाया कि बच्चों को प्रभाव में लेकर झूठे बयान दिलवाए जा रहे हैं और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। उन्होंने कहा कि वे कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्हें षड्यंत्र के तहत फंसाया जा रहा है।

अदालत में कल निर्णायक सुनवाई

एडीजे पॉक्सो कोर्ट के निर्देशों के बाद पुलिस ने जांच की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। मेडिकल रिपोर्ट में जबरन यौन उत्पीड़न की पुष्टि होने के बाद पुलिस के पास कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार होने की बात कही जा रही है। आशुतोष ब्रह्मचारी ने इस प्रकरण को ‘धार्मिक संघर्ष’ बताते हुए दावा किया है कि उनके पास ऐसे सबूत हैं जो आरोपियों के खिलाफ सख्त सजा सुनिश्चित कर सकते हैं।

फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है। कल होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि शंकराचार्य को गिरफ्तार किया जाएगा या उन्हें राहत मिलेगी। इस हाई-प्रोफाइल केस ने आस्था, सत्ता और कानून के बीच गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और पूरे देश की नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हैं।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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