पड़ोसी देश बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला मयमनसिंह जिले से सामने आया है, जहां एक 50 वर्षीय हिंदू ज्वैलरी कारोबारी की बेरहमी से हत्या कर दी गई। बदमाशों ने सनसनीखेज तरीके से वारदात को अंजाम देते हुए मृतक के शव को एक ड्रम के अंदर बंद करके नहर के पानी में तैरने के लिए छोड़ दिया था। इस खौफनाक घटना के सामने आने के बाद से स्थानीय हिंदू समुदाय में भारी डर और रोष का माहौल बना हुआ है।
स्थानीय पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, बेगुनबाड़ी इलाके के पास एक नहर में पानी के ऊपर प्लास्टिक का एक संदिग्ध ड्रम तैरता हुआ दिखाई दिया था। जब आसपास के लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी और अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ड्रम को खोला, तो उसके अंदर से एक व्यक्ति का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। शुरुआती जांच के दौरान मृतक के शरीर, विशेषकर सिर और छाती के हिस्से पर धारदार हथियारों से किए गए गहरे जख्मों के कई निशान स्पष्ट रूप से दिखाई दिए।
पुलिस ने अपनी छानबीन को आगे बढ़ाते हुए मृतक की शिनाख्त करने की कोशिश शुरू की, जिसमें सफलता तब मिली जब शव की जेब से मयमनसिंह हिंदू कोऑपरेटिव क्रेडिट यूनियन लिमिटेड का एक टोकन हाथ लगा। इस सुराग के आधार पर वित्तीय संस्थान से संपर्क साधा गया, जिसके बाद मृतक की पहचान अठारबारी बिल्डिंग क्षेत्र में पार्टनरशिप में ज्वैलरी की दुकान चलाने वाले निरंजन चंद्र सूत्रधार के रूप में की गई। बाद में उनकी पत्नी सुमिता रानी सूत्रधार और बेटे जॉय सूत्रधार ने थाने पहुंचकर शव की आधिकारिक तौर पर पहचान की।
इस मर्माहत करने वाली घटना ने एक बार फिर से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जानकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूनुस सरकार के कार्यकाल से शुरू हुआ यह दौर मौजूदा प्रशासन के शासनकाल में भी बदस्तूर जारी है। देश के विभिन्न हिस्सों में लगातार हो रही ऐसी वारदातों के कारण अल्पसंख्यक खुद को बेहद असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और उनके सामने गंभीर मानवीय संकट खड़ा हो गया है।
फिलहाल पुलिस इस पूरे अंधी कत्ल की गुत्थी को सुलझाने के लिए ताबड़तोड़ दबिश दे रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस जघन्य अपराध के पीछे असली साजिशकर्ता कौन थे और हत्या का असली मकसद क्या था। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर ही इस मामले में कोई ठोस सुराग हाथ लग सकेगा, लेकिन इस घटना ने पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों की गिरती कानून-व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।










