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BRICS Summit 2026: रूस का Su-57 और Su-75 पर बड़ा रक्षा प्रस्ताव, क्या भारत लेगा ऐतिहासिक फैसला?

Russian Su-57 stealth fighter jet in flight
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BRICS Summit 2026: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस समय ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है, जहां वैश्विक कूटनीति के साथ-साथ रक्षा सौदों पर भी दुनिया भर की निगाहें टिकी हुई हैं। इस बीच रूस की ओर से भारत को एक बहुत ही महत्वपूर्ण रक्षा प्रस्ताव मिलने की चर्चा जोरों पर है। कूटनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली द्विपक्षीय बातचीत में अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों को लेकर अहम चर्चा हो सकती है, जो दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को एक नई दिशा दे सकती है।

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इस बड़े रक्षा प्रस्ताव के तहत रूस अपनी पांचवीं पीढ़ी के दुर्घटनावर्ती और स्टील्थ तकनीक से लैस लड़ाकू विमान सुखोई Su-57 को भारत के समक्ष पेश कर रहा है। मॉस्को का यह इरादा सिर्फ तैयार विमान बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भारत में ही इन एयरक्राफ्ट के स्थानीय उत्पादन और गंभीर तकनीकी हस्तांतरण यानी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी विचार कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह डील आगे बढ़ती है, तो यह भारत के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

सुखोई Su-57 अपनी बेहतरीन मारक क्षमता, रडार से बचने की अचूक खूबी और आधुनिक हथियारों के बेड़े के लिए वैश्विक स्तर पर जाना जाता है। रूस की योजना इसके निर्यात संस्करण Su-57E के साथ-साथ कई घातक एयर-टू-एयर और क्रूज मिसाइलों को भी इस पैकेज में शामिल करने की है। इसके अतिरिक्त, रूस के पास एक और विकल्प के रूप में Su-75 चेकमेट हल्का फाइटर जेट भी मौजूद है, जिसे कम लागत वाले सिंगल-इंजन विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान के सामने यह तय करने की बड़ी चुनौती होगी कि वे तात्कालिक जरूरतों के लिए किस विमान पर भरोसा जताते हैं।

वर्तमान परिस्थितियों में भारतीय वायुसेना के बेड़े में कम होती स्क्वाड्रन की संख्या और क्षेत्रीय मोर्चों पर लगातार बढ़ रही सुरक्षा चुनौतियों से निपटना एक बड़ी प्राथमिकता बन चुका है। भारत का अपना स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA प्रोजेक्ट अभी विकास के विभिन्न चरणों से गुजर रहा है, जिसे पूरी तरह तैयार होने में वक्त लगेगा। ऐसे में रूस का यह डबल ऑफर भारत को बिना ज्यादा वक्त गंवाए पांचवीं पीढ़ी की मारक क्षमता हासिल करने का एक व्यावहारिक विकल्प प्रदान कर सकता है।

हालांकि, इस पूरी डील की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि रूस भारत को केवल विमान मुहैया कराता है या फिर इंजन डिजाइन, रडार सिस्टम और मेंटेनेंस इकोसिस्टम की पूरी तकनीक भारत को हस्तांतरित करने के लिए राजी होता है। ब्रिक्स सम्मेलन की पृष्ठभूमि में होने वाली यह उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक तय करेगी कि आने वाले दिनों में भारत और रूस का रक्षा सहयोग किस ऊंचाई को छूता है और भारतीय वायुसेना की ताकत में कितना जबरदस्त इजाफा होता है।

Shivam Verma
Author: Shivam Verma

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