Delhi News: दिल्ली के चर्चित सत्य निकेतन इलाके में हुए दर्दनाक इमारत हादसे ने पांच हंसते-खेलते परिवारों के सपनों को हमेशा के लिए चकनाचूर कर दिया है। प्रशासन और राहत एजेंसियों द्वारा चलाए गए लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सामने आए आंकड़ों ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक हादसे में कुल सात लोगों की जान चली गई है, जिनमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के पांच होनहार छात्र भी शामिल हैं जो इस इमारत में किराए के कमरे में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे थे। एम्स अस्पताल में सभी शवों का पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद उनकी पहचान कर ली गई है, जिससे पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।
अपनी जिंदगी गंवाने वाले इन युवाओं में मध्य प्रदेश के देवास से ताल्लुक रखने वाले अर्पित राज भी शामिल थे, जो अभी कुछ ही दिन पहले अपने घर पर रक्षाबंधन का त्योहार मनाकर वापस दिल्ली लौटे थे। वहीं कटनी के रहने वाले अक्षत सिंह यादव एक बेहतरीन फुटबॉलर और वक्ता होने के साथ-साथ आईपीएस अफसर बनने का सपना संजोए हुए थे। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के दुर्ग से ताल्लुक रखने वाले युवराज सोनी अपने पिता की मेडिकल दुकान का इकलौता सहारा थे, जबकि उत्तर प्रदेश के अभिषेक कुमार और पवन कुमार भी कम उम्र में ही इस त्रासदी का शिकार हो गए। इन सभी की उम्र महज सोलह से बीस वर्ष के बीच थी और वे अपने उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद लेकर राजधानी आए थे।
इस हृदयविदारक घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इमारत के मालिक हरिराम, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर दिया है, जहां से उन्हें हिरासत में भेज दिया गया है। हालांकि, मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी जनता और छात्रों के मन में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या सिर्फ मकान मालिक को सजा मिलने से व्यवस्था सुधर जाएगी। स्थानीय प्रशासन, नगर निगम और बिल्डिंग निर्माण की अनुमति देने वाले विभागों की लापरवाही पर पर्दा डालना अब मुश्किल नजर आ रहा है, क्योंकि बिना पुख्ता सुरक्षा मानकों के चल रही ऐसी इमारतें लगातार मासूमों की जान ले रही हैं।
हादसे के बाद सत्य निकेतन और आसपास के इलाकों में पीजी में रहने वाले हजारों छात्रों के बीच भारी दहशत और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है। अपनी जान बचाने के डर से कई छात्र रातों-रात अपने पीजी छोड़कर श्री वेंकटेश्वर कॉलेज पहुंचे, जहां कॉलेज प्रशासन ने उनके रहने और खाने के अस्थाई इंतजाम किए हैं। डरे-सहमे छात्रों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि इलाके के सभी प्राइवेट पीजी और हॉस्टल्स की तत्काल प्रभाव से स्ट्र estructural सेफ्टी जांच कराई जाए ताकि किसी अन्य छात्र को इस तरह की लापरवाही का शिकार न होना पड़े।











