World News: आज के दौर में दुनिया भर के कई प्रमुख देशों में जनता का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है. फ्रांस और अमेरिका से लेकर इटली और अर्जेंटीना तक, विभिन्न राष्ट्रों में लोग सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. आसमान छूती महंगाई, बेरोजगारी और बदहाल होती अर्थव्यवस्था ने आम नागरिकों का जीना मुश्किल कर दिया है, जिसके चलते दुनिया भर में विरोध प्रदर्शनों की एक बड़ी लहर देखने को मिल रही है.
फ्रांस में हालात सबसे ज्यादा तनावपूर्ण बने हुए हैं, जहां राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले जनता का आक्रोश फूट पड़ा है. ईंधन के दाम बढ़ने और घटती क्रय शक्ति के विरोध में लाखों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ छात्र और शिक्षक शिक्षा बजट में कटौती के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं. बेल्जियम और अल्बानिया में भी यूनिवर्सिटी की फीस बढ़ने और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को लेकर छात्रों का गुस्सा पुलिस के साथ झड़पों में बदल गया है.
पुर्तगाल और इटली जैसे यूरोपीय देशों में भी आर्थिक संकट गहराता जा रहा है. पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में प्रॉपर्टी के दाम और किराए आसमान छू रहे हैं, जिससे कम आय वाले परिवारों और युवाओं के लिए गुजर-बसर करना कठिन हो गया है. वहीं तुर्किये में लगातार बढ़ती महंगाई और कम पेंशन से परेशान वरिष्ठ नागरिकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, और अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं.
लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटीना में भी राष्ट्रपति की बजट कटौती नीतियों के खिलाफ छात्रों और ट्रेड यूनियनों का गुस्सा साफ झलक रहा है. अमेरिका में भी राजनीतिक नीतियों और चुनाव से जुड़े मुद्दों को लेकर विभिन्न शहरों में रैलियों और प्रदर्शनों का दौर जारी है. जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते इन वैश्विक आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं निकाला गया, तो यह असंतोष और अधिक तूल पकड़ सकता है.










